Wakf Amendment Act : Supreme Court का बड़ा फैसला- वक्फ कानून की 5 साल वाली 'प्रैक्टिसिंग मुस्लिम' होने वाली शर्त को किया खारिज

Edited By Updated: 15 Sep, 2025 11:20 AM

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सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने वक्फ बोर्ड का सदस्य बनने के लिए 5 साल तक इस्लाम का पालन करने की शर्त और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े प्रावधान पर रोक लगाई। अदालत ने कहा कि जब तक उचित नियम नहीं बनते,...

नेशनल डेस्क: Supreme Court ने हाल ही में वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस कानून के कुछ अहम प्रावधानों पर रोक लगा दी है। कोर्ट का यह फैसला वक्फ बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति और वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड से जुड़ा है। कोर्ट ने वक्फ बोर्ड का सदस्य बनने के लिए व्यक्ति को 'प्रैक्टिसिंग मुस्लिम' यानि की कम से कम 5 साल तक इस्लाम का पालन करने की शर्त को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जब तक इस संबंध में सही नियम नहीं बन जाते, तब तक यह प्रावधान लागू नहीं होगा।

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राजस्व रिकॉर्ड और संपत्ति से बेदखली पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 3(74) से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड के प्रावधान पर भी रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के अधिकारों को तय करने का अधिकार कार्यपालिका को नहीं है। जब तक राजस्व रिकॉर्ड में संपत्ति के नाम को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक किसी को भी वक्फ संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस दौरान किसी तीसरे पक्ष के अधिकार नहीं बनेंगे।

वक्फ बोर्ड की संरचना पर टिप्पणी

अदालत ने वक्फ बोर्ड की संरचना पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बोर्ड में अधिकतम 3 गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं, जिसका मतलब है कि 11 सदस्यों में से बहुमत मुस्लिम समुदाय से होना चाहिए। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां तक संभव हो, बोर्ड का CEO मुस्लिम ही होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसका यह आदेश वक्फ अधिनियम की वैधता पर अंतिम राय नहीं है, और संपत्ति के पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों में कोई कमी नहीं पाई गई है।

 

 

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