सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब सेना में महिलाओं को भी परमानेंट कमीशन

Edited By Updated: 24 Mar, 2026 11:09 PM

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देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने महिला अधिकारियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि सशस्त्र बलों में उन्हें परमानेंट कमीशन से वंचित रखना भेदभावपूर्ण है।

नेशनल डेस्क: देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने महिला अधिकारियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि सशस्त्र बलों में उन्हें परमानेंट कमीशन से वंचित रखना भेदभावपूर्ण है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेना में अवसर केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रह सकते, बल्कि महिलाओं को भी समान अधिकार और करियर सुरक्षा मिलनी चाहिए।

अनुच्छेद 142 के तहत दिया गया न्याय

कोर्ट ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने का आदेश दिया। इसके तहत उन महिला अधिकारियों को राहत देने के निर्देश दिए गए, जो लंबे समय से समान अधिकार की मांग कर रही थीं।

क्या था पूरा मामला

यह मामला उन महिला अधिकारियों से जुड़ा था जो शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत सेना में शामिल हुई थीं। उनका कहना था कि जहां पुरुष अधिकारियों को स्थायी सेवा का अवसर मिलता है, वहीं महिलाओं को 10 से 14 साल बाद सेवा छोड़नी पड़ती है। इससे उनका करियर प्रभावित होता है और वे पेंशन जैसी सुविधाओं से भी वंचित रह जाती हैं।अदालत ने माना कि यह अंतर योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद पूर्वाग्रहों के कारण था।

 पहले क्या थी व्यवस्था

अब तक सेना, नौसेना और वायुसेना में महिलाओं की भर्ती मुख्य रूप से शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए होती थी। इस व्यवस्था में सेवा की अवधि सीमित होती थी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। वहीं पुरुष अधिकारियों को परमानेंट कमीशन मिलने के कारण उन्हें लंबी सेवा, प्रमोशन और पेंशन जैसे लाभ मिलते थे।

फैसले के बाद क्या बदलेगा

इस निर्णय के बाद महिला अधिकारियों के लिए सेना में करियर का दायरा काफी बढ़ जाएगा। अब उन्हें भी स्थायी सेवा का अवसर मिलेगा, जिससे वे रिटायरमेंट तक अपनी सेवाएं दे सकेंगी। इसके साथ ही प्रमोशन के रास्ते भी खुलेंगे और योग्य महिला अधिकारी उच्च पदों तक पहुंच सकेंगी। कोर्ट ने चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की बात भी कही है।

पूर्व अधिकारियों को भी राहत

अदालत ने उन महिला अधिकारियों को भी राहत दी है, जो पहले सेवा से बाहर हो चुकी हैं। एक विशेष व्यवस्था के तहत उनकी सेवा अवधि को मान्यता देते हुए उन्हें पेंशन और अन्य लाभ देने का निर्देश दिया गया है।

सेना में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी

इस फैसले के बाद उम्मीद है कि अधिक महिलाएं सशस्त्र बलों में करियर बनाने के लिए आगे आएंगी। इससे सेना में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा और संस्थान और अधिक आधुनिक और समावेशी बनेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल महिला अधिकारियों के अधिकारों की जीत है, बल्कि यह देश की सशस्त्र सेनाओं को अधिक समान और प्रगतिशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
 

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