भारत का वो अनोखा 'Silent Village', जहां पैदा होते ही गूंगे-बहरे हो जाते हैं लोग, वजह कर देगी हैरान

Edited By Updated: 27 Jun, 2026 10:59 AM

that village in jammu dadhkai where people become deaf mute at birth

भारत में रहस्यों और अनोखी परंपराओं वाले गांवों की कमी नहीं है लेकिन जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक ऐसा गांव है जिसकी हकीकत आपको हैरान कर देगी। इस गांव का नाम है धड़काई (या दधकाई) जिसे आज पूरी दुनिया Silent Village के नाम से जानती है। इस गांव की...

Deaf and Dumb Village India : भारत में रहस्यों और अनोखी परंपराओं वाले गांवों की कमी नहीं है लेकिन जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक ऐसा गांव है जिसकी हकीकत आपको हैरान कर देगी। इस गांव का नाम है धड़काई (या दधकाई) जिसे आज पूरी दुनिया Silent Village के नाम से जानती है। इस गांव की सबसे बड़ी और अजीब बात यह है कि यहां की आधी से ज्यादा आबादी न तो बोल सकती है और न ही सुन सकती है। यहां के लगभग हर परिवार में कम से कम एक सदस्य मूक-बधिर (Deaf and Dumb) है। वजह जानकर आप हैरान हो जाएंगे।  

PunjabKesari

धड़काई गांव के बुजुर्गों के मुताबिक इस रहस्यमयी सिलसिले की शुरुआत आज से करीब 125 साल पहले हुई थी। गांव में पहला मूक-बधिर बच्चा साल 1901 में पैदा हुआ था। इसके बाद जैसे-जैसे साल बीतते गए ऐसे बच्चों के पैदा होने की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। आज आलम यह है कि इस गांव में आम गांवों की तरह बच्चों की खिलखिलाहट, बातचीत या शोर-शराबा सुनाई नहीं देता।

यह भी पढ़ें: जॉर्जिया की संसद में प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान सांसदों में चले जमकर लात-घूंसे, Video Viral

पूरा गांव एक अजीब से सन्नाटे में डूबा रहता है। गांव के कुछ बुजुर्ग आज भी इसे किसी पुराने दैवीय प्रकोप या श्राप से जोड़कर देखते हैं लेकिन डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की रिसर्च कुछ और ही कहती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह कोई श्राप नहीं बल्कि एक दुर्लभ जेनेटिक (आनुवंशिक) बीमारी है।

PunjabKesari

इस गांव के लोग सदियों से बाहरी दुनिया से कटे हुए हैं। लंबे समय तक एक ही सीमित समुदाय और आपस के रिश्तेदारों में शादियां होने के कारण यह जेनेटिक खराबी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती चली गई जिसने आज पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया है। बोल और सुन न पाने के बावजूद यहां के लोग हार नहीं मानते। इस गांव के लोगों ने जीने का एक अनोखा तरीका ढूंढ निकाला है।

PunjabKesari

यह भी पढ़ें: कतर हादसा: रास लाफ़ान ब्लास्ट में मारे गए सभी 12 भारतीयों के शव वतन लौटे

यहां बच्चे, बूढ़े और जवान सभी इशारों की भाषा में महारत रखते हैं। लोग एक-दूसरे से इतनी तेजी से इशारों में बात करते हैं कि बाहर से आने वाला व्यक्ति दंग रह जाता है। गांव के लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए मुख्य रूप से खेतीबाड़ी, पशुपालन और छोटे-मोटे मजदूरी के कामों पर निर्भर हैं।

PunjabKesari

इस गांव की सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकार यहां मूक-बधिर बच्चों के लिए विशेष स्कूल (Special Schools) और स्पीच थेरेपिस्ट की व्यवस्था करे तो इन बच्चों का भविष्य सुधर सकता है। पिछले कुछ सालों में देश-विदेश के कई बड़े रिसर्चर्स और डॉक्टरों की टीम इस गांव का दौरा कर चुकी है ताकि इस दुर्लभ जेनेटिक म्यूटेशन को रोक कर आने वाली पीढ़ी को बचाया जा सके।

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!