मौत को मात: हार्ट अटैक के बाद बड़ा खुलासा, नागपुर में 70 साल की महिला का दिल दाईं तरफ निकला

Edited By Updated: 20 Jan, 2026 08:59 PM

the heart of a 70 year old woman in nagpur was on the right side

महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसा चौंकाने वाला और दुर्लभ मेडिकल मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया है। नागपुर के साओनेर इलाके में रहने वाली 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला के शरीर में दिल सामान्य जगह यानी बाईं ओर नहीं, बल्कि दाईं तरफ पाया...

नेशनल डेस्कः महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसा चौंकाने वाला और दुर्लभ मेडिकल मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया है। नागपुर के साओनेर इलाके में रहने वाली 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला के शरीर में दिल सामान्य जगह यानी बाईं ओर नहीं, बल्कि दाईं तरफ पाया गया। यह मामला तब सामने आया जब महिला को हार्ट अटैक आया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सीने में दर्द के बाद अस्पताल पहुंची महिला

साओनेर की रहने वाली महिला को सीने में तेज दर्द और सांस लेने में परेशानी होने लगी, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें हिंगना रोड स्थित लता मंगेशकर अस्पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हितेंद्र भगवतकर ने तुरंत जांच शुरू की।

जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच

जांच के दौरान डॉक्टरों को एक अविश्वसनीय सच्चाई पता चली। महिला का दिल शरीर के बाईं ओर नहीं, बल्कि दाईं ओर स्थित था। आमतौर पर ऐसा बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलता है। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी के कारण होती है।

क्या है ‘डेक्सट्रोकार्डिया’?

चिकित्सा विज्ञान में इस बीमारी को ‘डेक्सट्रोकार्डिया’ कहा जाता है। यह एक जन्म से होने वाला रोग है।इसमें दिल की दिशा उलटी होती है और वह दाईं ओर होता है। दुनिया भर में इसके मामले बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। सबसे हैरानी की बात यह रही कि महिला 70 साल तक इस सच्चाई से पूरी तरह अनजान रहीं और उन्हें कभी किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

इलाज के दौरान आईं दो बड़ी चुनौतियां

डॉक्टरों के सामने इस केस में दो बेहद बड़ी चुनौतियां थीं:

  1. महिला का दिल दाईं ओर था, जिससे सभी रक्त नलिकाएं भी उलटी दिशा में थीं

  2. दिल की मुख्य नस एलएडी (Left Anterior Descending artery) करीब 90 प्रतिशत तक ब्लॉक थी

दिल की संरचना उलटी होने के कारण एंजियोप्लास्टी करना बेहद जोखिम भरा और तकनीकी रूप से कठिन हो गया था।

डॉक्टरों ने बचाई जान, पेश की मिसाल

डॉ. हितेंद्र भगवतकर और उनकी विशेषज्ञ टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। तमाम तकनीकी जटिलताओं के बावजूद उन्होंने सफलतापूर्वक स्टेंट डालकर रक्त प्रवाह को सामान्य किया। उनकी सूझबूझ और अनुभव की बदौलत महिला की जान बच गई।

अब पूरी तरह सुरक्षित, अस्पताल से मिली छुट्टी

सफल इलाज के बाद महिला की हालत अब पूरी तरह स्थिर और बेहतर है। उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉ. भगवतकर ने बताया कि इको टेस्ट के दौरान इस दुर्लभ स्थिति की पुष्टि हुई थी और टीम ने सावधानीपूर्वक इलाज कर इस चुनौती को पार किया।

डॉक्टरों को मिली बधाई

इस सफल और ऐतिहासिक इलाज के लिए विधायक डॉ. आशीष देशमुख, अस्पताल के डीन डॉ. सजल मित्रा, और अन्य वरिष्ठ डॉक्टरों ने डॉ. भगवतकर और उनकी पूरी टीम को बधाई दी है।

मेडिकल जगत के लिए अहम मामला

यह केस न सिर्फ महिला के लिए नई जिंदगी का तोहफा है, बल्कि मेडिकल क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो बताता है कि सही समय पर पहचान और विशेषज्ञ इलाज से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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