डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड पर CBI का बड़ा प्रहार: ₹1.86 करोड़ की ठगी का खुलासा, 6 राज्यों में रेड, तीन आरोपी गिरफ्तार

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 07:21 PM

digital arrest fraud

साइबर अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने डिजिटल अरेस्ट ठगी से जुड़े एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

नेशनल डेस्क: साइबर अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने डिजिटल अरेस्ट ठगी से जुड़े एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। केरल के कोट्टायम के एक बुजुर्ग से करीब 1.86 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में एजेंसी ने देश के छह राज्यों में एक साथ छापेमारी कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया। जांच में संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क की जड़ें कई राज्यों तक फैली हुई थीं और इसके अंतरराष्ट्रीय संपर्क भी हो सकते हैं।

 किन राज्यों में हुई कार्रवाई?

CBI की टीमों ने गोवा, बेंगलुरु (कर्नाटक), पलक्कड़ (केरल), नागपुर (महाराष्ट्र), हैदराबाद (तेलंगाना) और दिल्ली में एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। रेड के दौरान कई डिजिटल डिवाइस, डेबिट कार्ड, बैंक से जुड़े दस्तावेज और अन्य अहम साक्ष्य जब्त किए गए। इन सामग्रियों की फॉरेंसिक जांच जारी है, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है।

ऐसे रचते थे ठगी का जाल

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह दो प्रमुख तरीकों से वारदात को अंजाम देता था:

1. म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क

फर्जी या किराए पर लिए गए बैंक खातों का उपयोग कर ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था, ताकि ट्रैक करना मुश्किल हो सके।

2. फर्जी सिम और KYC धोखाधड़ी

5G अपग्रेड या मोबाइल सेवा अपडेट का झांसा देकर लोगों से KYC दस्तावेज लिए जाते थे। उन्हीं दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड जारी कर फ्रॉड कॉल किए जाते थे।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, ठगी की रकम को आगे क्रिप्टोकरेंसी और शेल कंपनियों के माध्यम से छिपाया जाता था।

 कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

  • ब्लेसिन जैकब अब्राहम (गोवा) – होटल से पकड़ा गया। म्यूल अकाउंट ऑपरेटर के रूप में काम करता था और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन के जरिए रकम ट्रांसफर करने में अहम भूमिका निभाता था।
  • मोहम्मद मुश्ताक (नागपुर) – शेल कंपनी के माध्यम से बैंक खाते संचालित करता था और ठगी की राशि अपनी कंपनी के खाते में मंगवाता था।
  • मोहम्मद जुनैद (बेंगलुरु) – फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने का जिम्मा संभालता था। 5G अपग्रेड के नाम पर लोगों के दस्तावेज इकट्ठा करता था।

जांच जारी, विदेशी कनेक्शन की भी पड़ताल

CBI ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है। एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों और संभावित विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही है। यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। एजेंसी का उद्देश्य संगठित साइबर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई कर डिजिटल सिस्टम में लोगों का भरोसा बनाए रखना है।

एजेंसी ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कॉल/वीडियो कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” या कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाए तो घबराएं नहीं। संदिग्ध कॉल, लिंक या भुगतान मांगने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और व्यक्तिगत/बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें।

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