कांग्रेस प्रभारी सुर्जेवाला की कुशल रणनीति से तीन वर्षों में कर्नाटक में संगठन हुआ मजबूत और सौहार्दपूर्ण माहौल में नेतृत्व में हुआ बदलाव

Edited By Updated: 05 Jun, 2026 08:43 PM

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कर्नाटक राज्य में तमाम कयासों के विपरीत जिस तरह से सत्ता व संगठन में सौहार्दपूर्ण माहौल में बड़ा बदलाव हुआ है, उसे  कांग्रेस नेतृत्व की परिपक्वता और विशेष रूप से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुर्जेवाला की...

नेशनल डेस्क : कर्नाटक राज्य में तमाम कयासों के विपरीत जिस तरह से सत्ता व संगठन में सौहार्दपूर्ण माहौल में बड़ा बदलाव हुआ है, उसे  कांग्रेस नेतृत्व की परिपक्वता और विशेष रूप से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुर्जेवाला की संगठनात्मक क्षमता का परिणाम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत बनाने से लेकर सरकार बनने के बाद संगठन और सत्ता के बीच संतुलन कायम रखने तक रणदीप सुर्जेवाला ने एक कुशल रणनीतिकार की भूमिका निभाई है।

विश्लेषक मानते हैं कि तय अवधि में रणदीप सुर्जेवाला की कुशल रणनीति से सिद्धारमैया की जगह पर डी.के. शिवकुमार मुख्यमंत्री बनाया गया। उससे पहले बी.के. हरिप्रसाद को कर्नाटक कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। सारा बदलाव साहौर्दपूर्ण माहौल में हुआ। कांग्रेस के नजरिए से इस घटनाक्रम से पूरे देश में एक सकारात्मक संदेश गया है और इस पूरे प्रकरण में पार्टी प्रभारी रणदीप सुर्जेवाला सत्ता व संगठन के मद्देनजर एक मजबूत सूत्रधार के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

गौरतलब है कि सितंबर 2020 में जब कांग्रेस नेतृत्व ने रणदीप सिंह सुर्जेवाला को कर्नाटक का प्रभारी नियुक्त किया था, तब राज्य में पार्टी कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। संगठन को नई ऊर्जा देने, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और जनता के बीच कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने की आवश्यकता थी। सुर्जेवाला ने जिम्मेदारी संभालते ही राज्य के विभिन्न जिलों का लगातार दौरा शुरू किया। उन्होंने केवल नेताओं तक सीमित रहने के बजाय बूथ स्तर तक कार्यकत्र्ताओं से संवाद स्थापित किया और संगठन की कमजोर कडिय़ों को मजबूत करने का प्रयास किया। करीब अढ़ाई वर्षों तक उन्होंने कर्नाटक में लगातार सक्रिय रहकर संगठन को चुनावी चुनौती के लिए तैयार किया।

इस दौरान उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार, वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया और अन्य नेताओं के साथ समन्वय बनाकर संगठन को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार कांग्रेस के भीतर विभिन्न गुटों के बीच संवाद कायम रखना और उन्हें एक साझा लक्ष्य की ओर केंद्रित करना उस समय सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसे सुर्जेवाला ने सफलतापूर्वक संभाला। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने जनता के मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति तैयार की। इसमें रणदीप सुर्जेवाला की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने प्रदेशभर में जनसरोकारों से जुड़े विषयों को प्रमुखता देने और भाजपा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई तथा प्रशासनिक विफलताओं जैसे मुद्दों को मजबूती से उठाने की रणनीति बनाई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव प्रबंधन के स्तर पर भी सुर्जेवाला की रणनीति को काफी प्रभावी माना गया। टिकट वितरण के दौरान उन्होंने प्रदेश नेतृत्व के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसे उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित किया जो स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते थे। साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका दी गई। इससे भीतरघात की संभावनाएं कम हुईं और मतदाताओं के बीच कांग्रेस की एकजुट छवि उभरकर सामने आई। इस रणनीति का असर चुनाव परिणामों में भी दिखाई दिया।

साल 2023 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 224 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस ने 135 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक पुनरुत्थान के रूप में देखी गई। हालांकि चुनाव जीतने के बाद असली चुनौती सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने की थी। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार दोनों ही कांग्रेस के बड़े और प्रभावशाली नेता हैं। समय-समय पर नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता साझेदारी को लेकर चर्चाएं होती रहीं, लेकिन पार्टी के भीतर किसी बड़े सार्वजनिक टकराव की स्थिति पैदा नहीं हुई।

राजनीतिक विशेषकों का मानना है कि इसके पीछे सुर्जेवाला की संवाद और समन्वय आधारित कार्यशैली रही। जब 2023 में कर्नाटक में कांग्र्रेस की सरकार बनी तो उस समय तय हुआ कि दोनों ही नेता अढ़ाई-अढ़ाई वर्षों के लिए मुख्यमंत्री रहेंगे। इस बीच सुर्जेवाला ने प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाई। किसी भी संवेदनशील मुद्दे को सार्वजनिक विवाद बनने से पहले संवाद के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया गया। यही कारण है कि कर्नाटक में सत्ता संचालन अपेक्षाकृत स्थिर और संतुलित दिखाई दिया और तीन वर्षों बाद अब सिद्धारमैया की जगह डी. के. शिवकुमार मुख्यमंत्री बना दिए गए और उनकी सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यथिंद्रा सिद्धारमैया को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।

गांधी परिवार के भरोसेमंद सुर्जेवाला को संगठन का है लंबा अनुभव

उल्लेखनीय है कि रणदीप सुर्जेवाला की पहचान कांग्रेस के उन नेताओं में होती है जिन्हें संगठन संचालन का लंबा अनुभव है। हरियाणा की राजनीति से राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाने वाले सुर्जेवाला पार्टी के कई महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। कांग्रेस नेतृत्व का उन पर भरोसा भी उनकी कार्यशैली का प्रमाण माना जाता है। वे हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष, युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रहने के अलावा चार बार विधायक और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान में वे राजस्थान से राज्यसभा के सदस्य के अलावा कर्नाटक के प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव हैं।  कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं और पार्टी संगठन भी सक्रिय बना हुआ है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनावी जीत से आगे बढक़र सरकार को स्थिरता प्रदान करना और संगठन को सक्रिय बनाए रखना किसी भी प्रभारी की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। कर्नाटक में रणदीप सुर्जेवाला इस परीक्षा में सफल दिखाई देते हैं। कांग्रेस के भीतर भी यह धारणा मजबूत हुई है कि उन्होंने केवल चुनाव जिताने तक अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि सरकार और संगठन दोनों को मजबूती प्रदान करने का काम किया। यही वजह है कि उन्हें कांग्रेस के सबसे प्रभावी और सफल प्रभारियों में से एक माना जा रहा है।

प्रजाध्वनि यात्रा बनी थी कांग्रेस की जीत की आधारशिला

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 से पहले कांग्रेस ने जिस प्रजाध्वनि यात्रा की शुरुआत की थी, उसे चुनावी सफलता की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। 11 जनवरी 2023 को चिक्कोडी से शुरू हुई इस यात्रा का उद्देश्य जनता के मुद्दों को सीधे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना था। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने इस अभियान की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। यात्रा के दौरान महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याएं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेशभर में जनसभाएं कर जनता के बीच संवाद स्थापित किया। इस अभियान का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि कांग्रेस सीधे मतदाताओं से जुडऩे में सफल रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रजाध्वनि यात्रा ने कांग्रेस के पक्ष में सकारात्मक माहौल तैयार किया और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में मदद की। इसी दौरान तैयार की गई रणनीति ने आगे चलकर चुनावी जीत की नींव रखी।

पांच गारंटियों ने बदली लाखों परिवारों की तस्वीर

अहम बात यह है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस ने जिन पांच प्रमुख गारंटियों का वादा प्रदेश के लोगों से किया था, वे आज सरकार की पहचान बन चुकी हैं। कांग्रेस नेतृत्व और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुर्जेवाला के मार्गदर्शन में तैयार इन योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों के जीवन स्तर में सीधा सुधार लाना था। गृहलक्ष्मी योजना के तहत लगभग एक करोड़ घर की मुखिया महिलाओं को हर माह 2 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि सहायता दी जा रही है। गृह ज्योति योजना के अंतर्गत परिवारों को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है। अन्न भाग्य योजना के तहत लगभग 4 करोड़ से अधिक लोगों को प्रतिमाह 10 किलो अनाज दिया जा रहा है। इसी प्रकार शक्ति योजना के तहत महिलाओं को राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान की गई है। वहीं युवा निधि योजना के माध्यम से लाखों बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। स्नातक बेरोजगारों को 3 हजार रुपए तथा डिप्लोमाधारकों को 1500 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन गारंटियों ने कांग्रेस सरकार को जनता के बीच मजबूत आधार प्रदान किया है और यही मॉडल अब राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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