सिक्किम में SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, बोला- ‘निर्वाचन आयोग के फैसले में दखल नहीं दे सकते’

Edited By Updated: 17 Aug, 2026 04:31 PM

the supreme court has taken a clear stand on the sikkim sir process stating

उच्चतम न्यायालय ने सिक्किम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए 2002 को आधार वर्ष तय करने के निर्वाचन आयोग के निर्णय में दखल देने से सोमवार को इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और...

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सिक्किम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए 2002 को आधार वर्ष तय करने के निर्वाचन आयोग के निर्णय में दखल देने से सोमवार को इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 'सिक्किमीज़ मूलनिवासी सुरक्षा संघ' नामक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

एसआईआर प्रक्रिया में की गई थी ये मांग 
इस याचिका में निर्वाचन आयोग को राज्य में जारी एसआईआर प्रक्रिया के लिए 2002 की जगह 1993 को आधार वर्ष मानने का निर्देश दिए जाने का आग्रह किया गया था। पीठ ने कहा, ''इस प्रक्रिया के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते। पूरे देश के लिए 2002 को आधार वर्ष माना गया है। हम भारत निर्वाचन आयोग के फ़ैसले में दखल नहीं देंगे।

याचिकाकर्ता की बात से सहमत नहीं हुआ सुप्रीम कोर्ट 
एनजीओ की दलील थी कि 2002 का मतदाता विवरण सिक्किम के जनसांख्यिकी विवरण से मेल नहीं खाता तथा 2002 को आधार वर्ष मानने से और भी विसंगतियां पैदा होंगी। हालांकि, पीठ याचिकाकर्ता की बात से सहमत नहीं हुई और कहा कि 2002 की मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं ने राज्य में बाद में हुए चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है। इसने कहा कि जारी एसआईआर प्रक्रिया के वास्ते, निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों के लिए 2002 को ही आधार वर्ष माना है, क्योंकि पिछला एसआईआर उसी साल हुआ था। 

संगठन के कहने पर निर्वाचन आयोग के निर्णय में दखल
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि एनजीओ के अलावा किसी अन्य व्यक्ति ने अदालत का रुख नहीं किया है। उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि संगठन के कहने पर निर्वाचन आयोग के निर्णय में दखल देने के लिए अदालत से कहना एक खतरनाक कदम होगा। वहीं, न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि हर सीमावर्ती राज्य में पलायन और जनसांख्यिकी बदलाव की समस्या का मुद्दा है। पीठ ने कहा कि 2002 को आधार वर्ष तय करने के निर्वाचन आयोग के फ़ैसले में दखल देने का कोई आधार नहीं बनता और याचिका खारिज की जाती है।
 

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