ITR New Rules : आयकर रिटर्न भरने वाले हो जाएं अलर्ट, हुआ ये बड़ा बदलाव

Edited By Updated: 19 Jun, 2026 09:03 PM

those filing itr should be alert this is a big change

वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करदाताओं को इस बार कई महत्वपूर्ण बदलावों का सामना करना पड़ेगा। आयकर विभाग ने विभिन्न ITR फॉर्म में संशोधन करते हुए कैपिटल गेन, शेयर ट्रेडिंग, बैंक बैलेंस और टैक्स छूट से...

नेशनल डेस्क : वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करदाताओं को इस बार कई महत्वपूर्ण बदलावों का सामना करना पड़ेगा। आयकर विभाग ने विभिन्न ITR फॉर्म में संशोधन करते हुए कैपिटल गेन, शेयर ट्रेडिंग, बैंक बैलेंस और टैक्स छूट से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है।

कर विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर विभाग अब वार्षिक सूचना विवरण (AIS), टीडीएस रिकॉर्ड, ब्रोकरेज रिपोर्ट और अन्य वित्तीय स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का मिलान कर रहा है। ऐसे में रिटर्न में दी गई जानकारी और विभाग के पास उपलब्ध डेटा के बीच किसी भी प्रकार का अंतर नोटिस या जांच का कारण बन सकता है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रेया गुप्ता गोयल के अनुसार, अब ITR फाइलिंग को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया मानना उचित नहीं होगा। करदाताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि रिटर्न में दी गई जानकारी विभाग के रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाती हो।

ITR-1 (सहज) में प्रमुख बदलाव

नए प्रावधानों के तहत अब दो मकानों से आय प्राप्त करने वाले करदाता भी ITR-1 फॉर्म का उपयोग कर सकेंगे। पहले ऐसी स्थिति में ITR-2 दाखिल करना अनिवार्य था। इसके अलावा, सूचीबद्ध शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड से धारा 112A के तहत प्राप्त 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) को भी ITR-1 में दर्शाया जा सकेगा। करदाताओं को अब वैकल्पिक पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी अतिरिक्त संपर्क जानकारी भी देनी होगी। वहीं, विदेश से पेंशन प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को विदेशी पेंशन खाते का विवरण देने से छूट दी गई है।

ITR-2 में बढ़ी रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी

ITR-2 फॉर्म में कैपिटल गेन से जुड़े लेनदेन की अधिक विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी। साथ ही, शेयर बायबैक से होने वाले नुकसान की अलग से रिपोर्टिंग करनी होगी। विदेशी संपत्ति, विदेशी बैंक खाते, विदेशी शेयरों या विदेश से होने वाली आय की जानकारी देना पहले की तरह अनिवार्य रहेगा। इसके अतिरिक्त, करदाताओं को अतिरिक्त संपर्क विवरण देने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है।

ITR-3 में ट्रेडिंग आय पर विशेष फोकस

ITR-3 फॉर्म में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O), इंट्राडे ट्रेडिंग, कमोडिटी ट्रेडिंग और करेंसी ट्रेडिंग से होने वाली आय की अलग-अलग जानकारी देना आवश्यक होगा। इसके साथ ही व्यापारिक गतिविधियों और बड़े वित्तीय लेनदेन से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी भी मांगी जाएगी। कुछ ऑडिट रिपोर्टिंग नियमों को सरल बनाया गया है तथा वैकल्पिक पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करने की सुविधा जोड़ी गई है।

ITR-4 (सुगम) में भी संशोधन

अनुमानित कराधान योजना (Presumptive Taxation Scheme) का लाभ लेने वाले करदाता अब दो मकानों तक की आय ITR-4 में दर्शा सकेंगे। धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की रिपोर्टिंग भी इसी फॉर्म में संभव होगी। इसके अलावा, 31 मार्च 2026 तक बैंक खातों में उपलब्ध शेष राशि (बैंक बैलेंस) की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। विदेशी पेंशन खाते का विवरण देने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है।

राजनीतिक चंदे पर बढ़ी निगरानी

एस.के. पाटोदिया एलएलपी के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर तन्ना के अनुसार, राजनीतिक दलों को दिए गए दान पर 100 प्रतिशत कर छूट का दावा करने वाले कई करदाताओं को हाल के दिनों में नोटिस प्राप्त हुए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आयकर विभाग ने ITR फॉर्म में नया कॉलम जोड़ा है, जिसमें दान प्राप्त करने वाले राजनीतिक दल का पैन (PAN) नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। वहीं, गैर-ऑडिट व्यवसायों और कुछ ट्रस्टों के लिए यह समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग से आय अर्जित करने वाले करदाताओं को भी 31 अगस्त तक रिटर्न दाखिल करने की अनुमति होगी, क्योंकि ऐसी आय को व्यवसायिक आय की श्रेणी में रखा जाता है।

संशोधित रिटर्न दाखिल करने के नियम

आयकर विभाग ने संशोधित (Revised) रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा भी बढ़ा दी है। करदाता जनवरी 2027 से मार्च 2027 के बीच संशोधित रिटर्न जमा कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए 5 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं को 1,000 रुपये और इससे अधिक आय वालों को 5,000 रुपये तक का विलंब शुल्क (Late Fee) देना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब आय छिपाने या किसी जानकारी को रिटर्न में शामिल न करने की संभावना बेहद कम हो गई है। आयकर विभाग को बैंक, म्यूचुअल फंड, ब्रोकरेज फर्म, नियोक्ता और अन्य संस्थानों से सीधे वित्तीय जानकारी प्राप्त होती है। ऐसे में करदाताओं को रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी विवरणों का सावधानीपूर्वक सत्यापन कर लेना चाहिए।

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