Edited By Parminder Kaur,Updated: 01 Jun, 2025 05:04 PM

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में इस्कॉन (ISKCON) द्वारा निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा इस साल एक बेहद ख़ास वजह से चर्चा में है। इस विशाल रथ में अब पुराने बोइंग 747 विमान के टायरों की जगह भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान 'सुखोई'...
नेशनल डेस्क. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में इस्कॉन (ISKCON) द्वारा निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा इस साल एक बेहद ख़ास वजह से चर्चा में है। इस विशाल रथ में अब पुराने बोइंग 747 विमान के टायरों की जगह भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान 'सुखोई' के टायरों का इस्तेमाल किया गया है। यह बदलाव न सिर्फ रथ की ऐतिहासिक यात्रा को और भी दिलचस्प बना रहा है, बल्कि यह एक अनूठी कहानी भी बयां करता है।
48 साल बाद बोइंग से सुखोई तक का सफर
इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधा रमन दास ने बताया कि कोलकाता के भगवान जगन्नाथ रथ में पिछले 48 वर्षों से विशाल बोइंग 747 विमान के टायर लगे हुए थे। इस भव्य रथ का निर्माण वर्ष 1977 में एक भक्त द्वारा करवाया गया था और उसी समय पुराने बोइंग 747 के टायरों को ख़रीदकर इसमें लगाया गया था। वर्ष 2005 में उन्होंने महसूस किया कि ये टायर अब अच्छी स्थिति में नहीं हैं और उन्हें बदलने की आवश्यकता है। हालांकि, बोइंग 747 के टायर ढूंढना मुश्किल हो गया।

सुखोई के टायरों तक कैसे पहुँचे?
बोइंग के टायरों की अनुपलब्धता के बाद इस्कॉन ने अन्य विकल्पों की तलाश शुरू की। राधा रमन दास के अनुसार, वर्ष 2018 में उन्हें जानकारी मिली कि सुखोई लड़ाकू जेट के टायर बोइंग 747 के टायरों के समान आकार के होते हैं। इसके बाद उन्होंने टायर निर्माता कंपनी MRF से संपर्क किया।
MRF के अधिकारी इस बात से हैरान थे कि इस्कॉन को सुखोई के टायरों की आवश्यकता क्यों है। उन्होंने इस दावे की पुष्टि के लिए अपने वरिष्ठ महाप्रबंधक को भेजा, जब MRF के वरिष्ठ अधिकारी आश्वस्त हो गए कि ये टायर वास्तव में भगवान जगन्नाथ के रथ में लगाए जाने हैं, तो उन्होंने सुखोई के टायर उपलब्ध कराने पर सहमति जताई।

देशभक्ति का प्रतीक बना रथ
राधा रमन दास ने गर्व के साथ बताया कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए तनाव के दौरान जिन सुखोई विमानों का इस्तेमाल किया गया था। अब उन्हीं के टायर इस रथ में लगाए गए हैं। यह रथ अब न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसमें भारतीय वायुसेना की शक्ति और शौर्य की भी झलक दिखाई देती है।
उन्होंने बताया कि कल रात (शनिवार) उन्होंने रथ का सफल ट्रायल भी किया। दास ने कहा, "अब हम यह कह सकते हैं कि कोलकाता की सड़कों पर कल रात सुखोई के टायर दौड़े हैं।" यह रथ यात्रा लगभग 24 किलोमीटर की दूरी तय करती है और इस बार सुखोई के टायरों के साथ यह यात्रा और भी ख़ास होने वाली है।