सरचार्ज पर रोक के बावजूद ग्राहकों पर पड़ सकता है UPI MDR का बोझ, IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में चेतावनी

Edited By Updated: 12 Oct, 2026 08:39 AM

upi mdr may push costs onto consumers despite surcharge ban iit bombay report

IIT बॉम्बे की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांज़ैक्शन के लिए संशोधित फीस स्ट्रक्चर से ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से ज्यादा रिटेल कीमतों का बोझ पड़ सकता है, भले ही व्यापारियों को सीधे ये चार्ज ग्राहकों पर डालने...

नई दिल्ली : IIT बॉम्बे की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांज़ैक्शन के लिए संशोधित फीस स्ट्रक्चर से ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से ज्यादा रिटेल कीमतों का बोझ पड़ सकता है, भले ही व्यापारियों को सीधे ये चार्ज ग्राहकों पर डालने से रोका गया हो। रिपोर्ट में प्रस्तावित मॉडल में बदलाव की मांग की गई है। रिपोर्ट का अनुमान है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) स्ट्रक्चर से पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए सालाना लगभग 18,000 करोड़ रुपए की कमाई हो सकती है। हालांकि, इसमें तर्क दिया गया है कि अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए बिजनेस इस अतिरिक्त खर्च को अपनी सामान्य बिक्री कीमतों में शामिल कर सकते हैं, जिससे 2,000 रुपए से कम के ट्रांजैक्शन करने वाले ग्राहकों को भी इस लागत का कुछ हिस्सा उठाना पड़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'अगर UPI को अभी प्रस्तावित MDR स्ट्रक्चर के अनुसार लागू किया जाता है, तो यह लोगों का भरोसा खो सकता है।' साथ ही यह भी कहा गया है कि लागू करने से पहले इस स्ट्रक्चर में 'बदलाव और इसे तर्कसंगत बनाने' की जरूरत है। संशोधित स्ट्रक्चर के तहत 2,000 रुपए से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर 0.40 प्रतिशत तक MDR लग सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन 300 रुपए होगी। व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर और 2,000 रुपए तक के मर्चेंट पेमेंट मुफ्त रहेंगे। कुछ जरूरी सेक्टर के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपए की फ्लैट फीस लगेगी, जबकि कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन पर 0.02 प्रतिशत का चार्ज लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए होगी। 

अगस्त 2026 के डेटा का इस्तेमाल करते हुए रिपोर्ट का अनुमान है कि मर्चेंट UPI ट्रांज़ैक्शन की कुल वैल्यू लगभग 9 लाख करोड़ रुपए थी, जिसमें से लगभग 6 लाख करोड़ रुपए के पेमेंट 2,000 रुपए से ज्यादा के थे। 0.25 प्रतिशत के प्रभावी औसत MDR को मानते हुए इससे हर महीने 1,500 करोड़ रुपए की कमाई का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में क्रेडिट कार्ड स्वीकार करने वाले आउटलेट्स पर UPI यूजर्स पर पहले से मौजूद बोझ की ओर भी इशारा किया गया है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि UPI, डेबिट कार्ड और कैश का इस्तेमाल करने वालों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से उठाए गए क्रेडिट कार्ड मर्चेंट फीस का खर्च FY26 में 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि व्यापारी आम तौर पर सभी पेमेंट तरीकों के लिए एक जैसी कीमतें रखते हैं, इसलिए इन ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों को मिलने वाले रिवॉर्ड और फायदों का खर्च उठाना पड़ सकता है। डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त चार्ज लगाने की जरूरत पर सवाल उठाते हुए रिपोर्ट का अनुमान है कि बैंकों ने वित्त वर्ष 2026 में करंट और सेविंग्स अकाउंट डिपॉजिट से 4.84 लाख करोड़ रुपए का नेट इंटरेस्ट मार्जिन कमाया। इसमें कहा गया है कि बैंकों को इस कमाई का लगभग 3 प्रतिशत, यानी सालाना करीब 15,000 करोड़ रुपए, UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने में योगदान देना चाहिए। 

रिपोर्ट में डिजिटल पेमेंट के लिए चार्ज लगाने और करेंसी मैनेजमेंट की ज्यादा लागत के बावजूद ATM से मुफ्त निकासी की सुविधा बनाए रखने के बीच के अंतर पर भी जोर दिया गया। उन्होंने डेट कलेक्शन और लोन चुकाने के ट्रांजैक्शन को MDR से छूट देने की मांग की है क्योंकि इससे डिजिटल पेमेंट की लागत बढ़ सकती है, खासकर माइक्रोफाइनेंस उधारकर्ताओं के लिए। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि 50 करोड़ रुपए से ज्यादा सालाना टर्नओवर वाले ऑनलाइन व्यापारियों और व्यवसायों पर ही चार्ज लगाया जाए, प्रतिशत-आधारित MDR को 40 रुपए तक सीमित किया जाए और इससे होने वाली कमाई को UPI के लगातार विस्तार और सुरक्षा में लगाया जाए। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि एक ज्यादा टारगेटेड फ्रेमवर्क UPI की ग्रोथ के अगले चरण में मदद कर सकता है और साथ ही डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्राहकों को केंद्र में रख सकता है। 

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