वोटर लिस्ट विवाद पर ममता बनर्जी का धरना जारी, SIR प्रक्रिया के खिलाफ पेंटिंग बनाकर जताया विरोध

Edited By Updated: 10 Mar, 2026 06:09 PM

west bengal voter list controversy

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने मतदाता सूची संशोधन को लेकर अपना विरोध जारी रखा है। Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ उनका धरना पांचवें दिन भी जारी रहा।

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने मतदाता सूची संशोधन को लेकर अपना विरोध जारी रखा है। Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ उनका धरना पांचवें दिन भी जारी रहा। कोलकाता के मेट्रो चैनल (एस्प्लेनेड) इलाके में चल रहे इस प्रदर्शन ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

पेंटिंग के जरिए जताया विरोध

मंगलवार को धरने के दौरान ममता बनर्जी ने मंच पर एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। उन्होंने एक हरे रंग के बोर्ड पर पेंट से चित्र बनाकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

बोर्ड के ऊपर “SIR” लिखा गया था, जबकि बीच में सफेद रंग से “Vanish” शब्द उकेरा गया। इसके बाद उन्होंने बोर्ड पर कई गोलाकार आकृतियां और नक्शे जैसा एक आउटलाइन बनाया और धीरे-धीरे हरे हिस्सों को सफेद रंग से ढक दिया।

इस पूरी प्रक्रिया को उन्होंने ऐसे दिखाया जैसे मतदाता सूची से नाम धीरे-धीरे गायब किए जा रहे हों। प्रदर्शन के दौरान वे शांत और संयमित नजर आईं। संयोग से इसी समय Election Commission of India के प्रमुख प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे।

क्यों शुरू हुआ धरना

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 6 मार्च 2026 को मेट्रो चैनल पर सिट-इन प्रदर्शन शुरू किया था। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के तहत राज्य में बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।

All India Trinamool Congress (TMC) का दावा है कि यह कदम आगामी चुनाव से पहले कुछ मतदाताओं को मतदान से वंचित करने की कोशिश है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

इस विवाद को लेकर मामला Supreme Court of India तक पहुंच चुका है। सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श लेकर एक नोटिफिकेशन जारी करे।

इसके तहत पूर्व मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की भागीदारी से एक अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाने की बात कही गई है, जो मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर अंतिम सुनवाई करेगा। राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि अब तक करीब 7 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि लगभग 57 लाख मामले अभी भी लंबित हैं।

चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

धरने के दौरान कई ऐसे लोगों को मंच पर बुलाया गया जिनका दावा है कि वे जीवित हैं, लेकिन मतदाता सूची में उन्हें मृत दिखाया गया है। इससे यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति में बड़ा चुनावी विषय बनता जा रहा है।
 

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