महात्मा गांधी से पहले नोटों पर किसकी थी तस्वीर? जानें कब और क्यों हटाई गई, देखें तस्वीरें

Edited By Updated: 06 Feb, 2026 09:34 PM

whose picture was on the banknotes before mahatma gandhi

भारतीय करेंसी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर आज हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी है। दशकों से नोटों पर छपी यह छवि इतनी सामान्य हो गई है कि शायद ही कोई इसके पीछे का इतिहास सोचता हो। लेकिन सवाल उठता है- महात्मा गांधी से पहले भारतीय नोटों...

नेशनल डेस्क : भारतीय करेंसी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर आज हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी है। दशकों से नोटों पर छपी यह छवि इतनी सामान्य हो गई है कि शायद ही कोई इसके पीछे का इतिहास सोचता हो। लेकिन सवाल उठता है- महात्मा गांधी से पहले भारतीय नोटों पर किस शख्स का चेहरा हुआ करता था, और आखिर गांधी जी को ही क्यों चुना गया?

महात्मा गांधी की तस्वीर पहली बार 1969 में उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर एक स्मारक नोट पर दिखाई दी थी। उस नोट में गांधी जी बैठे हुए थे और पीछे सेवाग्राम आश्रम की झलक थी। इसके बाद 1987 में ₹500 के नोट को दोबारा प्रचलन में लाया गया, जिस पर एक बार फिर गांधी जी की तस्वीर छापी गई। हालांकि, निर्णायक बदलाव 1996 में आया, जब भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘महात्मा गांधी सीरीज़’ की शुरुआत की। तभी से भारत में जारी होने वाले सभी नोटों पर उनका चेहरा स्थायी रूप से शामिल हो गया।

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लेकिन इससे पहले की कहानी बिल्कुल अलग थी। आज़ादी से पहले, जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब भारतीय नोटों पर अंग्रेज़ शासकों की तस्वीरें छपती थीं। उस दौर में सबसे पहले किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर वाले नोट चलन में थे। बाद में किंग जॉर्ज षष्ठम की तस्वीर वाले नोट जारी किए गए, जो इंग्लैंड में छपकर भारत लाए जाते थे। इन नोटों का काग़ज़ और डिज़ाइन उस समय के हिसाब से काफ़ी उन्नत और आकर्षक माना जाता था।

1947 में आज़ादी के बाद भारत सरकार ने बड़ा और प्रतीकात्मक फैसला लिया। विदेशी शासकों की तस्वीरें हटाने का निर्णय किया गया और तय हुआ कि नए भारतीय नोटों पर किसी व्यक्ति की फोटो नहीं होगी। यह कदम भारत की नई पहचान और आत्मनिर्भर सोच को दर्शाने के लिए उठाया गया। इसी कारण नोटों पर अशोक स्तंभ का सिंह चिन्ह, खेती, विकास और भारतीय संस्कृति से जुड़े चित्रों को जगह दी गई। कई वर्षों तक यही स्वरूप जारी रहा।

फिर 1990 के दशक में जब नई करेंसी सीरीज़ लाने की तैयारी हुई, तो सवाल उठा- अब नोटों पर किसे दर्शाया जाए? इस पर विचार के बाद महात्मा गांधी को चुना गया। वजह साफ थी- गांधी जी न सिर्फ भारत की आज़ादी का सबसे बड़ा चेहरा थे, बल्कि वे विश्व स्तर पर सत्य और अहिंसा के प्रतीक माने जाते हैं। उनकी पहचान वैश्विक थी और किसी राजनीतिक विवाद से भी परे थी। इसी सोच के तहत 1996 में पहली बार ₹10 और ₹500 के नोटों पर उनका चित्र छापा गया, जो धीरे-धीरे सभी मूल्यवर्ग के नोटों पर लागू हो गया।

हालांकि, समय-समय पर नोटों से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने या बदलने की मांग भी उठती रही है। कुछ लोगों ने जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल या देवी-देवताओं की तस्वीरें छापने की अपील की। लेकिन 2016 में तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया था कि पहले गठित समिति यह फैसला कर चुकी है कि भारतीय करेंसी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर बदलने की कोई ज़रूरत नहीं है।

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