Edited By Anu Malhotra,Updated: 23 Jan, 2026 02:31 PM

आज के दौर में किसी देश का पासपोर्ट सिर्फ पहचान पत्र नहीं, बल्कि उसकी वैश्विक हैसियत और कूटनीतिक पहुंच का पैमाना बन चुका है। इसी आधार पर जारी हुई Henley Passport Index 2026 की नई रैंकिंग ने दुनिया में ताकत के बदलते संतुलन को साफ कर दिया है। इस साल भी...
नेशनल डेस्क: आज के दौर में किसी देश का पासपोर्ट सिर्फ पहचान पत्र नहीं, बल्कि उसकी वैश्विक हैसियत और कूटनीतिक पहुंच का पैमाना बन चुका है। इसी आधार पर जारी हुई Henley Passport Index 2026 की नई रैंकिंग ने दुनिया में ताकत के बदलते संतुलन को साफ कर दिया है। इस साल भी सिंगापुर ने अपनी बादशाहत कायम रखते हुए दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट हासिल किया है। सिंगापुर का पासपोर्ट रखने वाले नागरिक अब 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं।
पूरी सूची में एशियाई देशों का दबदबा साफ नजर आता है। सिंगापुर के ठीक पीछे जापान और साउथ कोरिया हैं, जिन्हें 188 देशों में वीजा-फ्री एंट्री मिलती है। यूरोप के कई देश तीसरे और चौथे स्थान पर बने हुए हैं। वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पिछले 20 वर्षों में 57 पायदान की छलांग लगाकर खुद को टॉप 5 में पहुंचा दिया है, जो उसकी मजबूत होती वैश्विक पकड़ को दर्शाता है।
अमेरिका की वापसी, Top 10 में कई नए समीकरण
पिछले साल की गिरावट के बाद अमेरिका ने एक बार फिर टॉप 10 में जगह बना ली है। अमेरिकी पासपोर्ट धारकों को अब 179 देशों में बिना वीजा यात्रा की सुविधा मिल रही है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और मलेशिया भी दुनिया के टॉप 10 ताकतवर पासपोर्ट वाले देशों में शामिल हैं।
कमजोर पासपोर्ट की सूची में हालात और खराब
रैंकिंग का दूसरा सिरा कहीं ज्यादा चिंताजनक तस्वीर दिखाता है। अफगानिस्तान एक बार फिर सबसे कमजोर पासपोर्ट वाला देश बना है, जहां नागरिक सिर्फ 24 देशों में वीजा-फ्री यात्रा कर सकते हैं।
इसके बाद
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सीरिया 100वें स्थान पर।
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इराक 99वें।
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पाकिस्तान 98वें स्थान पर रहा है, जहां उसे यमन के साथ जगह मिली है।
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सोमालिया और अन्य संघर्षग्रस्त देश भी निचले पायदान पर बने हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आज दुनिया के सबसे ताकतवर और सबसे कमजोर पासपोर्ट के बीच का अंतर 168 देशों तक पहुंच चुका है। साल 2006 में यह फासला 118 देशों का था, यानी असमानता लगातार बढ़ी है।
पाकिस्तान की रैंक सुधरी, लेकिन फायदा घटा
पाकिस्तान ने रैंकिंग में मामूली सुधार करते हुए 98वां स्थान हासिल किया है और टॉप 100 में वापसी की है। यह पिछले 10 सालों में पहली बार हुआ है। हालांकि, स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है।
-पिछले साल 103वें स्थान पर रहते हुए पाकिस्तानी नागरिक 33 देशों में वीजा-फ्री यात्रा कर सकते थे।
-इस साल रैंक 98 होने के बावजूद यह संख्या घटकर 31 देश रह गई है।
भारत के लिए राहत की खबर-
भारत की स्थिति इस रिपोर्ट में सकारात्मक मानी जा रही है। भारत ने पांच पायदान की छलांग लगाते हुए 2026 में 80वां स्थान हासिल किया है।
2025 में भारत 85वें स्थान पर था-
अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को 55 देशों में वीजा-फ्री या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भले ही बड़ा उछाल न हो, लेकिन भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति में धीरे-धीरे हो रहे सुधार का संकेत जरूर देता है।
2026 के सबसे ताकतवर पासपोर्ट
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पहला स्थान: सिंगापुर – 192 देश
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दूसरा स्थान: जापान, साउथ कोरिया – 188 देश
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तीसरा स्थान: डेनमार्क, लक्ज़मबर्ग, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड – 186 देश
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चौथा स्थान: ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आयरलैंड, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे – 185 देश
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पांचवां स्थान: हंगरी, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, UAE – 184 देश
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छठा स्थान: क्रोएशिया, चेकिया, एस्टोनिया, माल्टा, न्यूजीलैंड, पोलैंड – 183 देश
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सातवां स्थान: ऑस्ट्रेलिया, लातविया, लिकटेंस्टाइन, यूनाइटेड किंगडम – 182 देश
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आठवां स्थान: कनाडा, आइसलैंड, लिथुआनिया – 181 देश
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नौवां स्थान: मलेशिया – 180 देश
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दसवां स्थान: अमेरिका – 179 देश
2026 के सबसे कमजोर पासपोर्ट
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101वां स्थान: अफगानिस्तान – 24 देश
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100वां स्थान: सीरिया – 26 देश
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99वां स्थान: इराक – 29 देश
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98वां स्थान: पाकिस्तान, यमन – 31 देश
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97वां स्थान: सोमालिया – 33 देश
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96वां स्थान: नेपाल – 35 देश
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95वां स्थान: बांग्लादेश – 37 देश
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94वां स्थान: इरिट्रिया, नॉर्थ कोरिया, फिलिस्तीनी क्षेत्र – 38 देश
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93वां स्थान: लीबिया, श्रीलंका – 39 देश
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92वां स्थान: ईरान – 40 देश