Edited By Tanuja,Updated: 22 Jul, 2026 04:15 PM

अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय महिला का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें उसने कहा कि वहां "प्रिंसेस ट्रीटमेंट" नहीं मिलता और हर काम खुद करना पड़ता है। हालांकि, पीने का पानी खरीदने वाले उसके दावे पर सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए और टैप वॉटर को सुरक्षित...
Washington: अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला ने विदेश में बसने की वास्तविक चुनौतियों को साझा करते हुए खासतौर पर महिलाओं को सलाह दी कि अमेरिका आने के बाद उन्हें घर जैसा आराम या "प्रिंसेस ट्रीटमेंट" मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। महिला ने कहा कि भारत में जहां कई लोगों को परिवार के सदस्य रोजमर्रा के कामों में मदद कर देते हैं, वहीं अमेरिका में हर छोटा-बड़ा काम खुद करना पड़ता है।
"हर काम खुद करना पड़ता है" महिला ने बताया कि नौकरी से लौटने के बाद भी खाना बनाना, सफाई करना, सामान खरीदना और घर के अन्य सभी काम खुद करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र जीवन का मतलब है कि हर जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। वीडियो में महिला ने बताया कि वह हर तीन दिन में करीब 3.50 डॉलर (करीब 300 रुपये) खर्च करके पीने का पानी खरीदती हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका आने के बाद सबसे पहली जिम्मेदारियों में से एक पीने के पानी का इंतजाम करना था।उन्होंने यह भी कहा कि भारी पानी की बोतलें उठाना थकाने वाला काम होता है और वहां के मौसम की वजह से उन्हें अब भी ड्राई स्किन की समस्या रहती है।
सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने महिला की इस बात से सहमति जताई कि विदेश में जीवन उतना आसान नहीं होता जितना अक्सर दिखाया जाता है।हालांकि, बड़ी संख्या में यूजर्स ने उनके पानी खरीदने वाले दावे पर सवाल उठाए। कई लोगों ने कहा कि अमेरिका के अधिकांश शहरों में नल का पानी (Tap Water) पीने के लिए सुरक्षित होता है। एक यूजर ने लिखा, "अगर किसी को नल का पानी पसंद नहीं है तो कम कीमत में RO या वॉटर फिल्टर लगवाया जा सकता है।" दूसरे यूजर ने टिप्पणी की, "अमेरिका के ज्यादातर इलाकों में टैप वॉटर पूरी तरह सुरक्षित है। बहुत कम लोग रोज बोतलबंद पानी खरीदते हैं।"
वीडियो ने छेड़ी नई बहस
यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर विदेश में जीवन की वास्तविकता, घरेलू जिम्मेदारियों और अमेरिका में रहने के अनुभवों को लेकर नई बहस का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे वास्तविक अनुभव बता रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि यह अनुभव हर व्यक्ति और हर शहर में अलग-अलग हो सकता है।