Edited By Vatika,Updated: 17 Feb, 2026 03:39 PM

फरवरी का आधा महीना बीतने के बाद मौसम ने अचानक तेज़ी से करवट लेना शुरू कर दिया है।
गुरदासपुर: फरवरी का आधा महीना बीतने के बाद मौसम ने अचानक तेज़ी से करवट लेना शुरू कर दिया है। इसके चलते क्षेत्र में ठंड का असर कमजोर पड़ने लगा है और दिन के समय गर्मी साफ महसूस की जा रही है। आज गुरदासपुर क्षेत्र में दिन का तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि रात का तापमान भी 11 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है। इस बदलाव के कारण लोगों को भारी सर्दी के कपड़ों से काफी हद तक राहत मिल गई है और दिन में लोग गर्म कपड़े पहनने से बच रहे हैं।
मौसम में आई इस गर्मी का सीधा असर वनस्पति और कृषि पर भी दिखाई देने लगा है। ठंड की मार से सूख चुकी घास और फसलों के पत्ते अब फिर से निकलने लगे हैं और अधिकतर फलदार पौधे व खेतों में खड़ी फसलें धूप से हरियाली और ताजगी से भरने लगी हैं, जिससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिली है। दूसरी ओर, मौसम के इस अचानक बदलाव ने कृषि विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ा दी है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि फसलों की लगातार निगरानी करना बहुत जरूरी है, खासकर गेहूं की फसल को इस समय संभावित समस्याओं से बचाने के लिए पूरी सतर्कता बरती जाए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसानों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है और न ही किसी फसल में किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि हुई है। लेकिन जिस तरह तापमान लगातार बढ़ रहा है, उसे देखते हुए फसलों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
खासकर इन दिनों गेहूं की फसल को पीली कुंगी (येलो रस्ट) से बचाने के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता बताई गई है। क्योंकि पंजाब में हर साल इस बीमारी का शुरुआती हमला नीम पहाड़ी क्षेत्रों जैसे रोपड़, आनंदपुर साहिब, नूरपुर बेदी, गढ़शंकर, नवांशहर, बलाचौर, होशियारपुर, माहिलपुर, मुकेरियां, गुरदासपुर, डेरा बाबा नानक, रमदास, कलानौर और पठानकोट आदि इलाकों से होता है। इस बीमारी की पहचान गेहूं के पत्तों पर पीली धारियां बनना और हल्दी जैसी धूल निकलने से होती है। यह धूल हवा के साथ पास के खेतों में फैलकर बीमारी को दूर तक फैला देती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नीम पहाड़ी क्षेत्रों में गेहूं की लगातार निगरानी की जा रही है और हाल ही में रोपड़ के चंदपुर बेला और गुरदासपुर के कुछ गांवों में 1-2 स्थानों पर एचडी 3386, पीबीडब्ल्यू 872 और पीबीडब्ल्यू 826 किस्मों में पीली कुंगी के शुरुआती लक्षण देखे गए हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि यदि फसल में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अपने नजदीकी कृषि कार्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र, फार्म सलाहकार सेवा केंद्र या विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से संपर्क करें, ताकि समय रहते कदम उठाकर फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।