किडनी खराब होने के बाद कितने दिन तक जी सकता है इंसान? जानिए कैसे करें इनकी देखभाल

Edited By Updated: 21 Oct, 2025 05:45 PM

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किडनी शरीर के लिए महत्वपूर्ण अंग है, जो खून साफ करने और हॉर्मोन नियंत्रित करने में मदद करती है। डॉ. भानु मिश्रा के अनुसार, दोनों किडनियां फेल होने पर यूरिमिया जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। समय पर डायलिसिस या ट्रांसप्लांट जीवन बचा सकता है। स्वस्थ...

नेशनल डेस्क : किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने, पेशाब बनाने और रक्तचाप व हार्मोनल कार्यों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन जब दोनों किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर देती हैं, तो यह एक गंभीर स्थिति बन जाती है। बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के कंसल्टेंट और नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भानु मिश्रा ने किडनी फेलियर के खतरों और इससे बचाव के उपायों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

किडनी फेल होने पर क्या होता है?
डॉ. मिश्रा के अनुसार, जब दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो जाती हैं, तो शरीर विषैले पदार्थों और अतिरिक्त तरल को बाहर नहीं निकाल पाता। इससे यूरिमिया नामक स्थिति उत्पन्न होती है, जिसमें शरीर में जहर फैलने लगता है। बिना इलाज के, व्यक्ति कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक ही जीवित रह सकता है। यह अवधि व्यक्ति की उम्र, अन्य शारीरिक स्थिति और किडनी फेल होने की गति पर निर्भर करती है। इस दौरान मरीज को हाथ-पैर में सूजन, थकान और कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।

डायलिसिस और ट्रांसप्लांट हैं जीवन रक्षक
डॉ. मिश्रा बताते हैं कि अगर समय पर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट नहीं कराया गया, तो शरीर में टॉक्सिन्स का स्तर बढ़ने से हाई ब्लड प्रेशर, सांस लेने में तकलीफ, कोमा और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। डायलिसिस शरीर से विषैले पदार्थों और अतिरिक्त पानी को निकालने में मदद करता है, जिससे मरीज कई सालों तक जीवित रह सकता है। किडनी ट्रांसप्लांट भी एक प्रभावी विकल्प है, जो मरीज को सामान्य जीवन जीने का मौका देता है। डॉ. मिश्रा ने सलाह दी कि किडनी फेलियर के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

स्वस्थ किडनी के लिए अपनाएं ये उपाय
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए डॉ. मिश्रा ने कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं:

हाइड्रेशन: पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेटेड रखें।

संतुलित आहार: नमक का सेवन कम करें और ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें।

व्यायाम: रोजाना व्यायाम करें और शारीरिक फिटनेस पर ध्यान दें।

सावधानी: दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक उपयोग और धूम्रपान से बचें।

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