Health Risk Awareness: चिप्स-कोल्ड ड्रिंक की लत तंबाकू जितनी खतरनाक! इनके शौकीन हो जाएं अलर्ट, नहीं तो...

Edited By Updated: 23 Feb, 2026 12:40 PM

ultra processed foods are not food but slow poison new study reveals

चिप्स का पैकेट हो, कोल्ड ड्रिंक की बोतल या फ्रोजन पिज्जा जो चीजें आपको स्वाद में लाजवाब लगती हैं वे आपके स्वास्थ्य के लिए सिगरेट जितनी ही खतरनाक हो सकती हैं। अमेरिका की हार्वर्ड और मिशिगन यूनिवर्सिटी की एक ताजा स्टडी ने दुनिया भर को चौंका दिया है।...

Chips and Soft Drink Health Risk : चिप्स का पैकेट हो, कोल्ड ड्रिंक की बोतल या फ्रोजन पिज्जा जो चीजें आपको स्वाद में लाजवाब लगती हैं वे आपके स्वास्थ्य के लिए सिगरेट जितनी ही खतरनाक हो सकती हैं। अमेरिका की हार्वर्ड और मिशिगन यूनिवर्सिटी की एक ताजा स्टडी ने दुनिया भर को चौंका दिया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (UPF) को उसी तरह इंजीनियर किया जाता है जैसे कभी तंबाकू उद्योग सिगरेट को डिजाइन करता था।

भोजन के नाम पर नशे की इंजीनियरिंग

रिपोर्ट के अनुसार सॉफ्ट ड्रिंक और पैकेट बंद स्नैक्स बनाने वाली कंपनियां एक खास रणनीति अपनाती हैं। इन उत्पादों में चीनी, नमक और फैट का ऐसा सटीक मिश्रण (Bliss Point) तैयार किया जाता है जो सीधे दिमाग के 'रिवॉर्ड सिस्टम' पर हमला करता है। इससे इंसान को इन चीजों की लत लग जाती है और वह बार-बार इन्हें खाने के लिए मजबूर हो जाता है।

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सिगरेट की तरह सख्त नियम बनाने की मांग

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये उत्पाद ताजे फल और सब्जियों के बिल्कुल उलट हैं। इनके बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि इन पर भी तंबाकू की तरह कड़े नियम लागू होने चाहिए:

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  • चेतावनी लेबल: पैकेट पर स्पष्ट रूप से स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी होनी चाहिए।

  • भारी टैक्स: इनके दाम बढ़ाए जाएं ताकि लोग कम इस्तेमाल करें।

  • बच्चों पर पाबंदी: स्कूलों और अस्पतालों के पास इनकी बिक्री और बच्चों को लुभाने वाले विज्ञापनों पर रोक लगे।

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आंकड़े दे रहे हैं खतरे की दस्तक

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल देशों के करीब 10 से 35 प्रतिशत छोटे बच्चे (5 साल से कम) नियमित रूप से मीठी सॉफ्ट ड्रिंक पी रहे हैं। 60% युवाओं ने स्वीकार किया कि वे रोज कम से कम एक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड उत्पाद जरूर खाते हैं। अमीर देशों में लोग अपनी दैनिक कैलोरी का आधा हिस्सा इन्हीं हानिकारक उत्पादों से ले रहे हैं।

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क्या है बचाव का रास्ता?

शोधकर्ताओं का कहना है कि खाना जीवन की बुनियादी जरूरत है इसलिए इसे पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता लेकिन हम जागरूक होकर अपनी थाली बदल सकते हैं। पैकेट बंद चीजों की जगह प्राकृतिक और ताजे भोजन को प्राथमिकता देना ही इस फूड एडिक्शन से बचने का एकमात्र तरीका है।

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