‘ऑनलाइन मनी गेम्स आदि का परिणाम’ हो रही मौतें, उजड़ रहे परिवार!

Edited By Updated: 05 Feb, 2026 05:22 AM

deaths ruined families are result of online money games and similar activities

भारत में सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया हुआ है लेकिन फिर भी यहां ‘डार्क वैब’ के जरिए कई ‘ऑनलाइन गेम्स’ चल रही हैं जिन्हें खेलने से न सिर्फ लोगों की बड़ी आॢथक हानि हो रही है बल्कि गेमिंग की लत के शिकार बच्चे और बड़े गेम के टास्क को पूरा...

भारत में सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया हुआ है लेकिन फिर भी यहां ‘डार्क वैब’ के जरिए कई ‘ऑनलाइन गेम्स’ चल रही हैं जिन्हें खेलने से न सिर्फ लोगों की बड़ी आर्थिक हानि हो रही है बल्कि गेमिंग की लत के शिकार बच्चे और बड़े गेम के टास्क को पूरा करने के चक्कर में अपने प्राण भी गंवा रहे हैं जिसकी पिछले 6 माह की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं : 

* 15 अगस्त, 2025 को ‘लखनऊ’ (उत्तर प्रदेश) में एक 18 वर्षीय युवक ने ऑनलाइन गेमिंग की अपनी लत पर काबू पाने की कोशिश में विफल रहने पर आत्महत्या कर ली। अपने सुसाइड नोट में उसने लिखा कि उसकी ऑनलाइन गेमिंग की लत उसके परिवार को संकट में डाल सकती थी। 

* 16 सितम्बर, 2025 को ‘लखनऊ’ (उत्तर प्रदेश) में छठी कक्षा में पढऩे वाले एक 13 वर्षीय बच्चे ने ऑनलाइन गेम खेलते हुए अपने पिता के 14 लाख रुपए डुबो दिए। बच्चे के पिता ने जब इसका पता चलने पर घर में उसकी करतूत की चर्चा की तो बच्चे को इतना गहरा सदमा लगा कि उसने पढ़ाई के बहाने अपने कमरे में जाकर फंदा लगा लिया। 
* 16 जनवरी, 2026 को पानीपत (हरियाणा) में एक युवक ने ‘एविएटर’ नामक ऑनलाइन गेम में लाखों रुपए हार जाने के कारण मानसिक तनाव में आकर फंदा लगा लिया और एक खुशहाल परिवार तबाह हो गया। 
मृतक के परिजनों के अनुसार उसने ‘एविएटर’ गेम की शुरूआत बहुत छोटी रकम से की थी। शुरू में कुछ छोटी रकमों की जीत ने उसका हौसला बढ़ाया लेकिन वे विजयें केवल एक जाल थीं जिनमें फंसने के बाद वह लगातार हारता चला गया जिसका अंजाम कर्ज व आत्महत्या में निकला। 

* 2 फरवरी, 2026 को ‘भोपाल’ (मध्य प्रदेश) में मोबाइल गेमिंग की लत के शिकार आठवीं कक्षा के 14 वर्षीय छात्र ‘अंश’ ने ‘ब्लू व्हेल’ गेम का आखिरी टास्क पूरा करने के जुनून में अपने घर में फांसी लगा ली। ‘ब्लू व्हेल’ गेम एक मनोवैज्ञानिक जाल है जो 50 दिनों तक चलता है। इसमें एक अज्ञात ‘एडमिनिस्ट्रेटर’ खिलाड़ी को हर दिन एक टास्क देता है। इसकी शुरूआत डरावनी फिल्में देखने और सुबह 4.20 बजे जागने जैसे साधारण कार्यों से होती है लेकिन 50वें दिन खिलाड़ी को आत्महत्या का टास्क दिया जाता है। यदि कोई खिलाड़ी बीच में खेल छोडऩा चाहे तो उसे और उसके परिवार को धमका कर मजबूर किया जाता है। हालांकि भारत सरकार ने 2017-18 में इस पर कड़ा प्रतिबंध लगाया था लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह गेम नए नामों से इंटरनैट के डार्क कोनों में आज भी मौजूद है। साइबर विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यदि बच्चा अचानक अकेला रहने लगे, रात भर जागकर फोन चलाए या उसके व्यवहार में चिड़चिड़ापन आए तो ये खतरे के संकेत हैं। 

* और अब 3 फरवरी, 2026 को देर रात ‘गाजियाबाद’ (उत्तर प्रदेश) में ‘ऑनलाइन टास्क बेस्ड कोरियन लव गेम’ खेलने की अभ्यस्त 3 सगी नाबालिग बहनों ने गेम का टास्क पूरा करने के बाद अपनी इमारत की 9वीं मंजिल से एक साथ कूद कर आत्महत्या कर ली। तीनों बहनें नहाने, खाने, स्कूल जाने और सोने जैसे सभी काम एक साथ ही किया करती थीं।

‘कोरियन टास्क बेस्ड गेम’ में खिलाड़ी को लक्ष्य दिए जाते हैं और वह उसी के अनुसार आगे बढ़ता है। पुलिस के अनुसार परिवार वालों ने कुछ समय से उनके मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। संभवत: इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया। देश में ऑनलाइन गेम्स के कारण हो रहे नुकसान को रोकने के लिए अगस्त, 2025 में संसद ने ‘प्रमोशन एंड रैगुलेशन आफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट-2025’ पारित किया था लेकिन इसके बावजूद ऑनलाइन गेम्स का प्रसार रुका नहीं है। अत: ऐसे प्लेटफाम्र्स के विरुद्ध तुरंत कार्रवाई करके इन पर रोक लगानी चाहिए। ऑनलाइन गेम के भयानक परिणामों के ये तो चंद उदाहरण मात्र हैं। इसी को देखते हुए पुलिस और प्रशासन द्वारा समय-समय पर अभिभावकों से अपील की जाती है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें ऐसी खतरनाक गेम्स से दूर रखें।—विजय कुमार 

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