‘रिश्वतखोरों को पकड़ने वाले’ ‘खुद ले रहे रिश्वत!’

Edited By Updated: 03 Dec, 2023 04:29 AM

those who catch bribe takers themselves taking bribes

सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद देश में भ्रष्टाचार का महारोग लगातार बढ़ता ही जा रहा है और नीचे के स्तर के कर्मचारियों से लेकर ऊपर तक के अधिकारी इसमें संलिप्त पाए जा रहे हैं। हद यह है कि एक ओर तो वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग के अधीन आर्थिक कानूनों...

सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद देश में भ्रष्टाचार का महारोग लगातार बढ़ता ही जा रहा है और नीचे के स्तर के कर्मचारियों से लेकर ऊपर तक के अधिकारी इसमें संलिप्त पाए जा रहे हैं। हद यह है कि एक ओर तो वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग के अधीन आर्थिक कानूनों को लागू करने, वित्तीय अपराधों की जांच करने और अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति को जब्त करने का काम करने वाले ‘एन्फोर्समैंट डायरैक्टोरेट’ (अर्थात ई.डी.) द्वारा आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध छापेमारी जोरों पर है, तो दूसरी ओर इसके अपने ही अधिकारी रिश्वतखोरी आदि के आरोपों में पकड़े जा रहे हैं। 

* 28 अगस्त को केंद्रीय जांच एजैंसी (सी.बी.आई.) ने दिल्ली शराब नीति से जुड़े एक मामले में एक व्यवसायी से 5 करोड़ रुपए रिश्वत के मामले में ई.डी. के सहायक निदेशक पवन खत्री तथा अपर डिवीजन क्लर्क नीतेश कोहार सहित 7 लोगों के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज की है। 

* 2 नवम्बर को जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ए.सी.बी.) ने ई.डी. के एक इंस्पैक्टर स्तर के अधिकारी नवल किशोर मीणा और उसके एक सहयोगी बाबू लाल मीणा को 15 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। ए.सी.बी. के एडीशनल डायरैक्टर जनरल हेमंत प्रियदर्शी ने आरोप लगाया था कि आरोपी अधिकारी नवल किशोर मीणा ने एक चिट फंड संबंधी केस निपटाने के लिए शिकायतकत्र्ता से 17 लाख रुपए रिश्वत मांगी थी। 
* 1 दिसम्बर को ई.डी. से जुड़े अधिकारियों की रिश्वतखोरी के मामलों में संलिप्तता का नवीनतम मामला सामने आया जब तमिलनाडु के मदुरैै में तैनात ई.डी. के एक अधिकारी अंकित तिवारी को 20 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोप में राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा और सतर्कता विभाग की संयुक्त टीमों ने गिरफ्तार किया। राज्य सरकार की एजैंसियों के अनुसार उक्त अधिकारी ने इसी वर्ष अक्तूबर में डिंडीगुल के एक सरकारी डाक्टर को किसी पुराने मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे 3 करोड़ रुपए की मांग की थी जिसके सम्बन्ध में अंतत: 51 लाख रुपयों में सौदा तय हुआ था। 

अंकित तिवारी द्वारा उक्त डाक्टर को व्हाट्सएप और मैसेज द्वारा धमकियां देने पर उसने 30 नवम्बर को भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के अधिकारियों से इस बारे शिकायत कर दी जिसके बाद डाक्टर द्वारा अंकित तिवारी को 1 दिसम्बर को रिश्वत की रकम की पहली किस्त के रूप में 20 लाख रुपए देने के समय अधिकारियों ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के परिसरों की तलाशी के दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा सुरक्षा उपाय के रूप में ई.डी. के कार्यालय के अंदर भारत-तिब्बत पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। इस सिलसिले में मदुरै स्थित ई.डी. कार्यालय और अंकित तिवारी के आवास पर छापे मारने के अलावा चेन्नई स्थित ई.डी. कार्यालयों में भी छापेमारी की गई तथा जांच के दौरान अंकित तिवारी द्वारा अनेक लोगों को ब्लैकमेल करके करोड़ों रुपए इकट्ठे करने और विभाग में अपने साथियों को उस रकम में से हिस्सा बांटने का भी पता चला है। 

पिछले कुछ महीनों में मनी लांड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामले में तमिलनाडु के 2 मंत्रियों को गिरफ्तार करने वाली ई.डी. के ही उक्त अधिकारी को स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार करने तथा ई.डी. द्वारा अवैध रेत खनन के मामले में कथित मनी लांड्रिंग को लेकर 5 जिलों के कलैक्टरों को सम्मन जारी करने के बाद से ई.डी. तथा राज्य सरकार में ठनी हुई है। उल्लेखनीय है कि पिछले 5 महीनों में रिश्वतखोरी के आरोप में ई.डी. के 3 अधिकारी पकड़े जा चुके हैं। सरकार द्वारा आर्थिक अपराधों को पकडऩे के लिए कायम किए गए विभाग के अधिकारियों द्वारा ही आर्थिक अपराधों में संलिप्त होना गंभीर अपराध और रक्षक के ही भक्षक बन जाने के समान है। अत: पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपयों की अवैध सम्पत्ति जुटाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए क्योंकि इस तरह के कृत्यों से ई.डी. की साख पर भी बट्टा लग रहा है।—विजय कुमार

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