कनाडा के बाद अब दुबई में बस रहे भारतीय

Edited By Updated: 01 Mar, 2023 05:19 AM

after canada indians are now living in dubai

भारतीयों का कनाडा बसने का सिलसिला अब दुबई की तरफ शिफ्ट हो रहा है।

भारतीयों का कनाडा बसने का सिलसिला अब दुबई की तरफ शिफ्ट हो रहा है। भारतीय रईस दुबई में बाकायदा मकान, फ्लैट खरीद रहे हैं। इस ट्रैंड का श्रेय मई 2019 में लागू संयुक्त अरब अमीरात की गोल्डन वीजा स्कीम को दिया जा रहा है। साल 2022 में रईस भारतीयों ने दुबई में 35,500 करोड़ रुपए से ऊपर के घर-मकान खरीदे। यह उससे पिछले साल 2021 से दोगुनी रकम है। दुबई में घर-दुकानों के खरीदारों में 40 फीसदी भारत से हैं, जो ज्यादातर पंजाब, दिल्ली-एन.सी.आर., हैदराबाद, सूरत और अहमदाबाद शहरों से हैं।

बाकी 40 फीसदी संयुक्त अरब अमीरात में रहते भारतीय हैं और 20 फीसदी दुनिया के दूसरे देशों में रह रहे भारतीय। दुबई में एक औसत फ्लैट की कीमत 3.6 से 3.8 करोड़ रुपए के बीच है। अगर किराए पर लें तो मासिक किराया करीब 3 से 3.5 लाख रुपए बैठता है। कई भारतीय कंपनियों के सी.ई.ओ. दुनिया के तमाम मुल्कों से दुबई की बेहतरीन कनैक्टिविटी के चलते घर ले रहे हैं। हालांकि कोविड बंदिशों के बीच 2020-21 में दुबई में प्रॉपर्टी मार्केट में भारी गिरावट आई थी, लेकिन बीते साल ऊंची छलांग लगाकर फिर 2015-16 के लैवल के शिखर को छूने लगी है।

दुबई के अलावा कनाडा, अमरीका, न्यूजीलैंड, ग्रीस, सिंगापुर, तुर्की, जर्मनी, स्पेन, स्विट्जरलैंड वगैरह समेत करीब 23 देशों में मिलती-जुलती गोल्डन वीजा स्कीम लागू है, लेकिन भारतीयों का हालिया रुझान दुबई की तरफ ही है। रईस भारतीयों में दुबई बसने की रफ्तार इतनी बढ़ी है कि बीते दो-अढ़ाई साल के दौरान दुबई में भारत का एक ‘नया शहर’ बन गया है। यूं भी, पहले लॉकडाऊन के बाद से तो देश-दुनिया में घूमने की बढ़ी बंदिशों के बीच दुबई नायाब ठिकाना बनकर उभरा है।

लॉकडाऊन के दौरान भारतीयों का कुछ दिवसीय आवास धीरे-धीरे स्थायी होने लगा। वजह साफ थी कि ऐसे वक्त में, जब दुनिया के ज्यादातर देशों ने बाहरी लोगों के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए, तो संयुक्त अरब अमीरात ने दौलतमंदों, स्टूडैंट्स, डॉक्टरों और कुछ अन्य नौकरीपेशा विदेशियों को आमंत्रित करने के लिए लाल गलीचे बिछा दिए। लेगो-लैंड और नए-नए म्यूजियम-मॉल के बीच कम दूरी, खुशनुमा आबोहवा और सोमवार से शुक्रवार के वर्क-कल्चर ने भारतीयों के दुबई आकर्षण को हवा दी।

इससे पहले मई 2019 में दुबई ने गोल्डन वीजा स्कीम लागू की, तो अगले 6 महीने में ही लगभग 2,500 विदेशियों ने इसे अपना लिया। असल में गोल्डन वीजा प्रणाली लागू होने से 10 साल की रिहायशी और कारोबारी सुविधा तो सोने पर सुहागा रही, हालांकि 5 साल का गोल्डन वीजा भी बनाया जा सकता है। इसके तहत अपनी मर्जी से बेरोक-टोक कोई कितनी ही बार दुबई से भारत और भारत से दुबई आ-जा सकता है। यही नहीं, कार-बाइक खुद चलाने के लिए तुंरत ड्राइविंग लाइसैंस भी बना दिया जाता है।

गोल्डन वीजा के अंतर्गत कोई भी विदेशी रईस निर्धारित मोटी इंवैस्टमैंट, दान या वहां सम्पत्ति खरीदने के एवज में रहने, बिजनैस करने और नागरिकता तक का अधिकार पा लेता है। गोल्डन वीजा दुबई में एक करोड़ दिरहम (करीब 23 करोड़ रुपए) इंवैस्ट करने पर मिलता है। भारत के विभिन्न कारोबारी संगठनों के कई उच्चाधिकारियों के अलावा संजय दत्त, शाहरुख खान, बोनी कपूर जैसी फिल्मी हस्तियों ने भी बढ़-चढ़ कर दुबई का रुख किया है। मौजूदा ट्रैंड के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं।

कुछ ने तो इसलिए क्योंकि दुबई में साफ-सफाई इतनी है कि वहां की सड़कों पर नंगे पांव भी चला जा सकता है। आबोहवा मूड और सेहत दोनों को खुशनुमा बनाती है। तो कई ने इसलिए कि महज एक लाख रुपए से कम खर्च कर भारत से दुबई आ-जा सकते हैं और अन्य ने इसलिए क्योंकि इंवैस्टमैंट करने पर टैक्स-फ्री विकल्प मौजूद हैं। यूरोपीय देशों और अमरीका के मुकाबले दुबई में रईस भारतीयों के बसने की अन्य सहूलियतों में से एक यह भी है कि दुबई में घरेलू कामकाज के लिए नौकर और आया आसानी से मिल जाती हैं। -अमिताभ

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