कैंसर : तथ्य और भ्रांतियां

Edited By Updated: 04 Feb, 2026 05:28 AM

cancer facts and myths

कैंसर शरीर की किसी कोशिका या कोशिकाओं के समूह की असामान्य वृद्धि है। इसे नष्ट न करने या न हटाने पर कैंसर बड़ी तेजी से फैल कर मौत का कारण बन सकता है। मानव शरीर में मौजूद अरबों कोशिकाएं आम तौर पर एक नियंत्रित पैटर्न में बढ़ती हैं जिनमें कभी-कभी होने...

कैंसर शरीर की किसी कोशिका या कोशिकाओं के समूह की असामान्य वृद्धि है। इसे नष्ट न करने या न हटाने पर कैंसर बड़ी तेजी से फैल कर मौत का कारण बन सकता है। मानव शरीर में मौजूद अरबों कोशिकाएं आम तौर पर एक नियंत्रित पैटर्न में बढ़ती हैं जिनमें कभी-कभी होने वाले बदलाव उन्हें कैंसर वाली कोशिकाओं में बदल देते हैं। कैंसर दुनिया भर में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है।  GLOBOCAN 2022 के अनुसार, उस वर्ष दुनिया भर में अनुमानित 19.96 मिलियन नए कैंसर के मामले सामने आए, और कैंसर से संबंधित लगभग 9.74 मिलियन मौतें दर्ज की गईं। दुनिया भर में कैंसर होने का जीवन भर का जोखिम हर 5 में से 1 व्यक्ति में होने का अनुमान है। 

फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में सर्वाधिक पाया जाने वाला कैंसर बनकर उभरा, जो सभी नए मामलों का लगभग 12.4 प्रतिशत था, इसके बाद महिलाओं में स्तन कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर थे। फेफड़ों का कैंसर कैंसर से संबंधित मृत्यु दर का मुख्य कारण बना रहा, जो इसकी आक्रामक प्रकृति और कई क्षेत्रों में निदान के समय देर से पता चलने को दर्शाता है। भारत में 2022 में  कैंसर के 14,13,316 नए मामले सामने आए व कैंसर से संबंधित 9,16,827 मौतें दर्ज की गईं।  भारत अपनी आबादी के आकार के कारण, पूर्ण कैंसर घटनाओं के मामले में दुनिया भर के शीर्ष 3 देशों में शामिल था। भारत में पुरुषों में, होंठ और मुंह, फेफड़े और इसोफेगस के कैंसर सबसे आम थे। महिलाओं में, ब्रैस्ट कैंसर सबसे आम डायग्नोस होने वाला कैंसर था। इसके बाद सर्वाइकल कैंसर और ओवेरियन कैंसर थे। 2022 में जम्मू-कश्मीर में कैंसर के लगभग 13,395 नए मामले सामने आए, जिसमें हाल के वर्षों में लगातार वृद्धि देखी गई है। क्षेत्र में कैंसर की घटनाओं में ऊपर की ओर रुझान दिखा है, जो 2020 में लगभग 12,726 मामलों से बढ़कर 2023 में 13,744 मामले हो गए हैं। 2022 में जम्मू और कश्मीर में लगभग 13,395 नए कैंसर के मामले सामने आए, जिसमें हाल के वर्षों में लगातार वृद्धि देखी गई है। 

स्टेट कैंसर इंस्टीच्यूट, जम्मू का उद्घाटन विश्व कैंसर दिवस 2022 यानी 4 फरवरी को किया गया था। अब तक यहां 18,000 से अधिक कैंसर रोगियों को पंजीकृत किया गया है और मैडीकल ऑन्कोलॉजी विभाग में PMJAY योजना के तहत लगभग 16,000 कैंसर रोगियों को मुफ्त कीमोथैरेपी आधारित उपचार मिला है। जम्मू में 2015 और 2024 के बीच 19,549 कैंसर मरीज रजिस्टर किए गए, जिनमें 56.6 प्रतिशत पुरुष तथा 43.4 प्रतिशत महिलाएं थीं। यहां भी फेफड़ों का कैंसर सबसे ज्यादा आम है, जो कुल मामलों का 14.72 प्रतिशत है। इसके बाद सिर और गर्दन के कैंसर हैं, जिनसे 10.90 प्रतिशत मरीज प्रभावित हुए। ब्रैस्ट कैंसर तीसरे स्थान पर है, जिसका योगदान 7.94 प्रतिशत है। ओरल कैंसर कुल मामलों का 4.67 प्रतिशत था, जो कैंसर के प्रकारों के अलग-अलग बोझ को दिखाता है, जिसमें फेफड़ों और सिर तथा गर्दन के कैंसर की बहुतायत हैं। विश्व कैंसर दिवस के मौके पर, मैं कैंसर पर कुछ रोशनी डालना चाहता हूं और आम लोगों के बीच फैली कुछ गलत धारणाओं को दूर करना चाहता हूं, क्योंकि जल्दी पता चलने पर इलाज संभव है। कैंसर के बारे में भ्रांतियां बेवजह की चिंता पैदा करके इससे बचाव और इलाज में भी रुकावट डाल सकती हैं।

कैंसर के आजीवन जोखिम का मतलब है कि किसी व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कभी भी कैंसर होने या उससे मरने की संभावना कितनी है। भारत में, कैंसर होने का आजीवन जोखिम लगभग 12 पुरुषों में से 1 और 13 महिलाओं में से 1 है। कैंसर सभी उम्र, लिंग और पृष्ठभूमि के लोगों को प्रभावित कर सकता है। बढ़ती उम्र और जीवनशैली तथा पर्यावरणीय जोखिमों के साथ जोखिम बढ़ जाता है।

सामान्य लक्षण : कैंसर के लक्षण अक्सर गैर-विशिष्ट होते हैं और सामान्य बीमारियों जैसे तपेदिक, टायफाइड बुखार, बार-बार मुंह के छाले, अपच या पुराने संक्रमण जैसे हो सकते हैं। लंबे समय तक लक्षणों का बने रहना, खासकर उचित इलाज के बावजूद, संदेह पैदा करता है। अत: इस हालत में और आगे की जांच करवानी चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कैंसर के निम्नलिखित चेतावनी संकेतों की पहचान की है : मल त्याग या पेशाब की आदतों में बदलाव, घाव का ठीक न होना, असामान्य रक्तस्राव, स्तन या कहीं और गाढ़ापन या गांठ, अपच या निगलने में कठिनाई, मस्से या तिल में स्पष्ट बदलाव, लगातार खांसी या आवाज में भारीपन आदि। दुनिया भर में कैंसर की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसका मुख्य कारण  तंबाकू और शराब का सेवन,गतिहीन जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर आहार (प्रसंस्कृत और जंक फूड),मोटापा, पर्यावरणीय प्रदूषण, जीवन प्रत्याशा में वृद्धि आदि है और इसीलिए आधुनिक समय में कैंसर को अक्सर जीवनशैली से संबंधित बीमारी माना जाता है। कैंसर संक्रामक नहीं है और संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता, परंतु कुछ संक्रमण कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। कैंसर का पारिवारिक इतिहास होने से जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन यह गारंटी नहीं देता कि किसी व्यक्ति को कैंसर होगा। सिर्फ 5-10 प्रतिशत कैंसर ही वंशानुगत होते हैं ज्यादातर कैंसर जीवन के दौरान होने वाले जेनेटिक म्यूटेशन, तंबाकू के सेवन, अल्ट्रावायलेट रेडिएशन,पर्यावरण और काम से जुड़े जोखिमों आदि के कारण होते हैं और लगभग 40 प्रतिशत कैंसर को  स्वस्थ आहार,नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखने, शराब का सेवन सीमित करने, तंबाकू से दूर रह कर बचा जा सकता है। जिन लोगों को वंशानुगत कैंसर सिंड्रोम का पता है, उन्हें कैंसर का खतरा कम करने के लिए निवारक (प्रोफिलैक्टिक) सर्जरी या दवाएं लेने की सलाह दी जा सकती है। हालांकि कैंसर कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक ग्लूकोज का सेवन करती हैं, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं है कि चीनी खाने से कैंसर खराब होता है या चीनी छोडऩे से कैंसर सिकुड़ता है या गायब हो जाता है। कैंसर के इलाज के दौरान ताकत और समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए संतुलित आहार आवश्यक है।

आर्टिफिशियल स्वीटनर जैसे : सैकरिन, एस्पार्टेम, सुक्रालोज, एसेसल्फेम, पोटेशियम, नियोटेम आदि पर किए गए व्यापक अध्ययनों में मनुष्यों में कैंसर के बढ़ते जोखिम का कोई सबूत नहीं मिला है। कैंसर हमेशा दर्दनाक नहीं होता तथा दर्द आमतौर पर तब होता है जब कैंसर हड्डियों में फैल कर नसों को दबाता है या उनमें घुस जाता है कैंसर मौत की सजा बिल्कुल नहीं है। शुरूआती पहचान, निदान और उपचार में प्रगति ने जीवित रहने की दर में काफी सुधार किया है। 60 प्रतिशत से अधिक कैंसर रोगी निदान के 5 साल या उससे अधिक समय तक जीवित रहते हैं और कई ठीक हो जाते हैं। क्या हर्बल उत्पाद कैंसर का इलाज नहीं कर सकते। किसी भी हर्बल या वैकल्पिक चिकित्सा को कैंसर का इलाज करने के लिए सिद्ध नहीं किया गया है तथा कुछ हर्बल उत्पाद कीमोथैरेपी या विकिरण में हस्तक्षेप कर सकते हैं और हानिकारक हो सकते हैं। उनका उपयोग करने से पहले हमेशा स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से सलाह लें। 

UICC की एक पहल और 2026 की थीम ‘यूनाइटेड बाय यूनिक’ हमें याद दिलाती है कि विविधता कैंसर के प्रति हमारे ग्लोबल रिस्पॉन्स को मजबूत करती है। व्यक्तिगत मतभेदों का सम्मान करते हुए एकजुट होकर, हम असमानताओं को कम कर सकते हैं, नतीजों में सुधार कर सकते हैं और एक ऐसा भविष्य बना सकते हैं जहां हर किसी को-चाहे वे कोई भी हों या कहीं भी रहते हों-अच्छी क्वालिटी की कैंसर देखभाल मिल सके।-डा. राजीव गुप्ता

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