Edited By ,Updated: 05 Sep, 2023 05:47 AM

चीन की मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, एक तरफ चीन की अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है तो दूसरी तरफ प्रकृति की मार भी चीन झेल रहा है। दोनों फ्रंट पर चीन एकदम बेबस-सा दिखाई दे रहा है। हालांकि प्राकृतिक आपदा को छोड़ दें तो बाकी परेशानी चीन ने खुद...
चीन की मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, एक तरफ चीन की अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है तो दूसरी तरफ प्रकृति की मार भी चीन झेल रहा है। दोनों फ्रंट पर चीन एकदम बेबस-सा दिखाई दे रहा है। हालांकि प्राकृतिक आपदा को छोड़ दें तो बाकी परेशानी चीन ने खुद अपने लिए खड़ी की है। चीन का निर्यात रीयल एस्टेट, पर्यटन उद्योग, इलैक्ट्रॉनिक उद्योग, परिवहन उद्योग सब कुछ ठप्प पड़ा है।
इस समय चीन में किसी भी तरह का औद्योगिक विकास नहीं हो पा रहा है बल्कि विकास का ग्राफ लगातार पिछले 7 महीनों से नीचे जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जुलाई में औद्योगिक कम्पनियों की संख्या में 6.7 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल रही है। विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था लगातार उभरने की कोशिश कर रही है लेकिन कोरोना महामारी के बाद उसे उभरने का मौका नहीं मिल रहा और लगातार चीन के औद्योगिक विकास में गिरावट देखी जा रही है।
लगातार 7 महीने से औद्योगिक विकास में गिरावट के कारण 15.5 प्रतिशत मुनाफे में वर्ष दर वर्ष नुक्सान होता जा रहा है। चीन के नैशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार इस वर्ष की पहली छमाही में औद्योगिक मुनाफे में 16.8 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। बाजार में मांग घटने के साथ ही चीन की औद्योगिक विकास की रफ्तार भी धीमी पडऩे लगी है और इसका सीधा असर पड़ा है चीन के औद्योगिक मुनाफे और औद्योगिक रोजगार पर, ये दोनों ही लगातार तेजी से गिरते जा रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद चीन की आर्थिक प्रगति ने रफ्तार नहीं पकड़ी, इस वजह से चीन की कई कम्पनियों को नुक्सान होने लगा, बाजार में उत्पादों की मांग कम होने से इन कम्पनियों को मुनाफा कम होने लगा जिसकी वजह से इन्हें अपने कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी।
ये कम्पनियां चाहे उत्पाद बनाने वाली हों या फिर सेवा उद्योगों से जुड़ी हों इन दोनों क्षेत्रों में चीन को नुक्सान होने लगा। कम आय, कम बचत और इसकी वजह से खर्च में भी कमी आने लगी। यह एक डोमीनो इफैक्ट की तरह काम करने लगा जिसने चीन की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका दिया। इसकी वजह से बैंकों को अपनी विकास दर को एक बार फिर बदलना पड़ा और इस बार सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम 5 प्रतिशत से भी कम विकास दर बैंकों ने घोषित की।
चीन की यह हालत कई वजहों से हुई है, इसके पीछे रीयल एस्टेट सैक्टर में आई मंदी, उपभोक्ता का बाजार पर से भरोसा उठना और कम खर्च करना, क्रैडिट ग्रोथ में अभूतपूर्व गिरावट आना है। क्रैडिट कार्ड का अर्थ बैंकों से कई सैक्टर की कम्पनियां अपने काम को बढ़ाने, उत्पादन को बढ़ाने, व्यापार को मजबूती देने के लिए कर्ज लेती हैं जिससे वे ज्यादा लोगों को नौकरियां देती हैं, उत्पादन बढ़ता है, इसका लाभ उनके मुनाफे में दिखता है। इस समय किसी सैक्टर की कोई भी कम्पनी अपने काम को बढ़ाने के लिए बैंकों से कर्ज नहीं ले रही है।