जी-20 : प्रधानमंत्री भारत को विश्व स्तर पर अग्रणी कतार में लाए

Edited By Updated: 26 Mar, 2023 05:28 AM

g 20 pm brings india to the forefront globally

भारत की जी-20 की अध्यक्षता करने पर दुनिया का ध्यान देश पर केंद्रित हुआ है। भारत विश्व स्तर पर अगुवाई करते हुए विश्व को दरपेश चुनौतियों का सामना करने के हल ढूंढने की तलाश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग्य रास्ता दिखाते हुए देश को दुनिया भर...

भारत की जी-20 की अध्यक्षता करने पर दुनिया का ध्यान देश पर केंद्रित हुआ है। भारत विश्व स्तर पर अगुवाई करते हुए विश्व को दरपेश चुनौतियों का सामना करने के हल ढूंढने की तलाश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग्य रास्ता दिखाते हुए देश को दुनिया भर में अग्रणी कतार में शामिल करने में सफल हुआ है। इस संबंध में देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्जनों बैठकें व कांफ्रैंस करवाई जा रही हैं, जिसमें अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद दुनिया भर में उजागर हो रही मुश्किलों के हल के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है। 

इस साल सितंबर में भारत लीडर्स समिट की मेजबानी करेगा। तब तक भारत जी-20 सदस्य देशों व विशेष आह्वान वाले देशों का मार्गदर्शन कर चुका होगा। यह बहुपक्षीय बैठकों की अगुवाई भारत बहुत ही सुचारू रूप से कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ता व नवीनता से चुनौतियों से निपटने का संकल्प ग्लोबल चुनौतियों संबंधी पहुंच को परिभाषित करता है। भारत की जी-20 संबंधी अध्यक्षता लोक मुखी शासन माडल की ओर से चिन्हित है, जो समस्याओं का हल करती है। दुनिया भर के लोगों को आर्थिक तरक्की से लाभ लेना चाहिए तथा यदि आर्थिक मंदी हो तो उसके बुरे प्रभावों से बचना चाहिए। साल 2020 से दुनिया ने कोविड-19 के कमजोर करने वाले प्रभावों को देखा है, जिससे विश्व भाईचारे को सबसे अधिक नुक्सान हुआ है। 

जी-20 भारत की प्रधानगी उन चुनौतियों का सामना कर रही है जो कोविड-19 महामारी के कारण मुख्य तौर पर भयानक हो गई है। ग्लोबल साऊथ में कई देशों के बढ़ते प्रभुसत्ता कर्जे, बहुपक्षीय विकास बैंकों, सरहदी आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध, बहुपक्षीय संस्थाओं, भोजन की कमी, जलवायु चुनौती, ग्लोबल सप्लाई चेन में विघ्न, सेहत संकट काल, आमदनी असमानता व कई चुनौतियां हैं जो अब विश्व समुदाय के सामने हैं। 

पिछले 3 सालों में कुछ ग्लोबल चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिस संबंधी विश्वसनीय व टिकाऊ निपटारे की जरूरत है। असल में भारत ने दिखाया है कि एक सूझवान शासन चुनौतियों का प्रभावशाली ढंग से हल कर सकता है। इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि महामारी काल के दौरान भी लोगों का जीवन स्तर सुधारने के प्रयास पर सरकार का खर्चा लगातार बढ़ रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में संशोधित बजट प्रक्रिया के अनुसार 2018-19 में शिक्षा पर 5.26 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए, 2022-23 में 7.57 लाख करोड़ रुपए सरकारी खर्च का खुलासा हुआ है। 

साल 2018-19 में स्वास्थ्य पर 2.66 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए, 2022-23 में सरकारी खर्च 5.49 लाख करोड़ रुपए था। लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में मदद करने वाले अन्य क्षेत्रों पर सरकारी व्यय 2018-19 में 4.86 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 8.26 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह प्रयास आर्थिक सर्वेक्षण के माध्यम से सामने आए आंकड़ों में परिलक्षित होता है, क्योंकि प्राथमिक विद्यालयों में ड्रॉपआऊट दर 2013-14 में 4.7 प्रतिशत से घटकर 2021-22 में 1.5 प्रतिशत हो गई है। 

2012-13 में छात्र-शिक्षक अनुपात 34 था और 2021-22 में यह 26.2 था। यह जी-20 देशों के लिए स्पष्ट संदेश है कि वैश्विक जी.डी.पी. 85 प्रतिशत,  75 प्रतिशत विश्व व्यापार और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास का मार्ग अपने चरम पर है। प्रशासन को लोगों को पहले रखना है और भविष्य की पीढिय़ों पर कर्ज का बोझ डाले बिना एक समावेशी विकास मॉडल सुनिश्चित करने के लिए सुधारों की रूपरेखा तैयार करनी है। ऐसे में बेंगलूर में वित्त मंत्रियों के ‘जी-20’ कार्यक्रम के मौके पर होने वाली बैठक में विकासशील और गरीब देशों के बढ़ते कर्ज के बोझ को दूर करने का मुद्दा बीच में होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक रूप से कमजोर देशों के कर्ज को कम करने के लिए वैश्विक सहमति बनाने का आह्वान किया। भारत की अध्यक्षता में जी-20 शांति की वैश्विक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए विशिष्ट स्थिति में है।-तरुण चुघ(राष्ट्रीय मंत्री, भारतीय जनता पार्टी)

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