भारत-कनाडा व्यापार संबंधों की सफलता में इंडो-कनाडियन समुदाय की भूमिका

Edited By Updated: 04 Jan, 2026 05:38 AM

role of indo canadian community in the success of india canada trade relation

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इस साल 2 अप्रैल से भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ और रूस से तेल खरीदने के कारण उतना ही अतिरिक्त ‘जुर्माना’ भी लगाया गया, जिससे कुल टैरिफ बढ़ कर 50 प्रतिशत हो गया। भारतीय निर्यात पर इसके विपरीत प्रभाव को...

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इस साल 2 अप्रैल से भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ और रूस से तेल खरीदने के कारण उतना ही अतिरिक्त ‘जुर्माना’ भी लगाया गया, जिससे कुल टैरिफ बढ़ कर 50 प्रतिशत हो गया। भारतीय निर्यात पर इसके विपरीत प्रभाव को देखते हुए भारत के लिए आवश्यक हो गया कि वह अन्य बाजारों में अवसर खोजे और इसी के परिणामस्वरूप कुछ देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफ.टी.ए.) किए गए। इन्हीं में कनाडा भी एक है जिसके साथ एफ.टी.ए. के लिए बातचीत चल रही है।

कनाडा सरकार ने भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (एफ.टी.ए.) पर जनता की राय लेने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। मगर  भारत विरोधी वल्र्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यू.एस.ओ.) और दूसरे खालिस्तानी संगठन एफ.टी.ए. के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं ताकि वह पटरी पर न चढ़ सके। हमारे संगठन फ्रैंड्स ऑफ कनाडा एंड इंडिया फैडरेशन ने एफ.टी.ए. के समर्थन में कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मंत्री मनिंदर सिद्धू को एक पत्र लिखा है, हम पूरे कनाडा में रेडियो और टी.वी. के जरिए लोगों को इसका समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, इससे डायस्पोरा (कनाडा में रहते भारतीय) को मदद मिलेगी। सबमिशन की आखिरी तारीख 27 जनवरी है।

पत्र में हमने लिखा है-हमें यह जानकर खुशी हुई कि भारतीय व्यापार मंत्री श्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय व्यापार मिशन नए साल में ओटावा का दौरा कर रहा है। भारत और कनाडा दो ऐसे समाज हैं, जिनकी लोकतंत्र, बहुलता और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति सम्मान की सांझी विरासत है, जो इन दोनों देशों को स्वाभाविक सहयोगी बनाती है। दोनों देशों के हित आॢथक क्षेत्र में भी मिलते हैं। आपसी हितों की यह बैठक व्यापक आॢथक सांझेदारी समझौते (सी.ई.पी.ए.) के सफल निष्पादन में बदलनी चाहिए। सरकारें इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि यह सांझेदारी तेल और गैस, खनिज और कृषि जैसे क्षेत्रों में किस मैक्रोइकोनॉमिक पैमाने पर पहुंच सकती है, जहां व्यापार में $25 बिलियन से बढ़ाकर $50 बिलियन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। भारत और कनाडा के संबंध खास हैं क्योंकि हमारे लोगों के बीच मजबूत संबंध हैं। इंडो-कनाडियन समुदाय की जड़ें कनाडा में 1887 से हैं। इंडो-कनाडियन समुदाय दोनों देशों के बीच एक जीवित पुल की तरह है। सफल और साधन संपन्न इंडो-कनाडियन समुदाय को माइक्रोइकोनॉमिक स्तर पर इस आॢथक सांझेदारी में विकास के इंजन के रूप में देखा जाना चाहिए।

‘लोगों का नैटवर्क’ दोनों देशों के बीच व्यापार के अवसरों के लिए नए रास्ते खोल सकता है, जिनकी अन्यथा कल्पना नहीं की जा सकती। इंडो-कनाडियन समुदाय इस समझौते में एक महत्वपूर्ण हितधारक है और दोनों सरकारों को सामुदायिक संगठनों द्वारा भागीदारी और निरंतर जुड़ाव को प्रोत्साहित करना चाहिए। सी.ई.पी.ए. को इंडो-कनाडियन समुदाय में बहुत समर्थन प्राप्त है। यह दुनिया में स्थिरता और कनाडा और भारत में आर्थिक समृद्धि लाएगा।-मनिंदर सिंह गिल (मैनेजिंग डायरैक्टर, रेडियो इंडिया, सरे, कनाडा)

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