ट्रम्प किस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहे हैं

Edited By Updated: 16 Jan, 2026 05:31 AM

how is trump violating international law

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दबदबा उस समय पूरी तरह से प्रदॢशत हुआ, जब उन्होंने फ्लोरिडा स्थित अपने आवास मार-ए-लागो में मंच पर आकर वेनेजुएला के खिलाफ अमरीकी सैन्य कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और...

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दबदबा उस समय पूरी तरह से प्रदॢशत हुआ, जब उन्होंने फ्लोरिडा स्थित अपने आवास मार-ए-लागो में मंच पर आकर वेनेजुएला के खिलाफ अमरीकी सैन्य कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को न्यूयॉर्क में ‘नार्को-आतंकवाद’ के आरोपों में मुकद्दमे का सामना करने के लिए गिरफ्तार करना एक ‘शानदार हमला’ था। उन्होंने घोषणा की कि अमरीका देश का ‘शासन’ चलाएगा और इसके तेल भंडार का उपयोग उन अमरीकी कंपनियों को मुआवजा देने के लिए करेगा, जिनके निगमों का लगभग दो दशक पहले राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था।

क्या वेनेजुएला में अमरीकी सैन्य कार्रवाई वास्तव में नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए थी? सन 2000 से, मादक पदार्थों की ओवरडोज से लगभग सवा दस लाख अमरीकी नागरिकों की मौत हो चुकी है। लेकिन, इनमें से लगभग 69 प्रतिशत मौतें फेंटानिल के कारण हुईं, जिसके पूर्ववर्ती रसायन चीन में उत्पादित होते हैं। वेनेजुएला अमरीका में कोकीन का एक मामूली स्रोत है। हालांकि, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। ट्रम्प की इस घोषणा के बाद कि अमरीकी तेल कंपनियां, जो ‘दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां’ हैं, अब दक्षिण अमरीकी देश में प्रवेश करेंगी, उनके इरादों की और पुष्टि की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है।

अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन : वेनेजुएला में अमरीका की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानून का सबसे घोर उल्लंघन है। इस बात पर जोर देने की शायद ही जरूरत है कि इस कार्रवाई ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन किया है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी या आत्मरक्षा (अनुच्छेद 51) के अलावा किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल के खतरे या उपयोग को प्रतिबंधित करता है। यह घटना अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में शक्ति संतुलन के बिगडऩे का संकेत देती है। मूल रूप से कई देशों के बीच शांति बनाए रखने के लिए यूरोप द्वारा निर्मित इस व्यवस्था में 20वीं शताब्दी में आमूल-चूल परिवर्तन हुए। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, इसने अमरीका और सोवियत संघ को मुख्य भूमिका में रखते हुए एक द्विध्रुवीय संरचना को जन्म दिया। इस दौरान, कोई भी देश बेरोकटोक शक्ति का इस्तेमाल नहीं कर सका। एक देश दूसरे को संतुलित करता रहा, जिससे एक नाजुक शांति बनी रही।

सत्ता का संतुलन : वेनेजुएला पर हमले से दिसम्बर, 1971 में बंगलादेश युद्ध के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में सत्ता के समीकरणों की याद आती है। इसने राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के भारत-विरोधी प्रशासन की साजिशों को नाकाम कर दिया। जब वाशिंगटन ने नई दिल्ली को डराने और आत्मसमर्पण कराने के लिए अमरीकी सातवें बेड़े की टास्क फोर्स टी.एफ.-74 को तैनात किया, तो सोवियत संघ ने क्रूजर, विध्वंसक और पनडुब्बियों की जवाबी तैनाती करके खतरे को बेअसर कर दिया। यह शक्ति संतुलन की अवधारणा के एक विशिष्ट उदाहरण के रूप में एक महाशक्ति द्वारा दूसरी महाशक्ति का प्रतिकार था। इसी तरह, जब 1973 के योम किप्पुर युद्ध में मिस्र की तीसरी सेना पर इसराईल के हाथों विनाश का खतरा मंडराया, तो सोवियत नेता लियोनिद ब्रेझनेव ने हवाई डिवीजनों को तैयार क्षेत्रों में तैनात किया, क्योंकि मिस्र मास्को का करीबी सहयोगी था। चिंतित अमरीका ने डेफकोन-3 (अमरीकी रक्षा तत्परता/खतरे का अलर्ट) घोषित किया। इसराईल ने आत्मसमर्पण कर दिया और सोवियत चेतावनी ने मिस्र की सेना को बचा लिया।

हालांकि, 1991 में सोवियत संघ के पतन के साथ, दुनिया ने अमरीका द्वारा सत्ता के अनियंत्रित दुरुपयोग को चुनौती देने में सक्षम एकमात्र शक्ति खो दी। इससे उत्साहित होकर, वाशिंगटन ने पूर्वनिवारक (प्री-एम्पटिव) युद्ध में शामिल होने का अधिकार प्राप्त कर लिया है। इसने प्रत्यक्ष कार्रवाई या समॢथत आंदोलनों के माध्यम से ईराक, मिस्र, लीबिया और सीरिया में सरकारों को उखाड़ फैंका है। निकट भविष्य में, केवल चीन ही अमरीका के प्रतिसंतुलन के रूप में उभर सकता है। रूस और चीन के बीच एक ढीला गठबंधन मौजूदा एकध्रुवीय संरचना को चुनौती दे सकता है, हालांकि प्रमुख शक्तियों के बीच मतभेद एक स्थायी सांझेदारी को रोक सकते हैं। अमरीका ने एक बार फिर भारत के सुरक्षा हितों के प्रति अपनी असंवेदनशीलता साबित कर दी है, ऐसे में नई दिल्ली को एक प्रतिसंतुलनकारी शक्ति बनने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है। उसे अपने सैन्य-औद्योगिक परिसर के निर्माण और रक्षा को मजबूत करने के लिए एक कल्पनाशील और लीक से हटकर रणनीति विकसित करनी होगी।-थॉमस मैथ्यू
 

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