पाकिस्तान के टुकड़े कर बंगलादेश बनाना क्या भारत की राजनीतिक भूल थी?

Edited By Updated: 11 Jan, 2026 05:28 AM

is it a political mistake of india to make bangladesh in pieces of pakistan

जिस बंगलादेश को बनवाने के लिए भारत ने 3,000 सैनिक शहीद करवाए, लगभग 1 लाख पाकिस्तानी सैनिकों का जनरल न्याजी की अध्यक्षता में आत्मसमर्पण हुआ, ‘मुक्ति वाहिनी’ ने जिस युक्तिसंगत ढंग से बंगलादेश को एक सर्वसत्ता सम्पन्न देश बनाया, लाखों ‘बंगलादेशी’ नौजवान...

जिस बंगलादेश को बनवाने के लिए भारत ने 3,000 सैनिक शहीद करवाए, लगभग 1 लाख पाकिस्तानी सैनिकों का जनरल न्याजी की अध्यक्षता में आत्मसमर्पण हुआ, ‘मुक्ति वाहिनी’ ने जिस युक्तिसंगत ढंग से बंगलादेश को एक सर्वसत्ता सम्पन्न देश बनाया, लाखों ‘बंगलादेशी’ नौजवान औरतों को पाकिस्तानी क्रूर सैनिकों के कैंपों से छुड़ाया, वह कृतघ्न क्यों बन गया? 1971 में बंगलादेश बना और 1975 आते-आते भारत का कट्टर दुश्मन भी बन गया? खालिदा-जिया और उनके पति जिआ-उर-रहमान, ‘बंगलादेश नैशनलिस्ट पार्टी’ (बी.एन.पी.) के संस्थापक दोनों मियां-बीवी इतनी जल्दी भारत विरोधी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कैसे बन गए? शेख मुजीब-उर-रहमान, जिन्हें बंगलादेश का लोकप्रिय नेता कहा जाता था, को इतनी जल्दी महज 3 वर्षों के अंतराल के बाद ही परिवार सहित क्यों मार दिया गया? 

माना कि यह सब कुछ पाकिस्तान की गुप्तचर एजैंसी आई.एस.आई. ने किया या करवाया, परन्तु आई.एस.आई. के इन घृणित कार्यों बारे बंगलादेश की सरकार ने दुनिया भर के राजनेताओं को क्यों नहीं बताया? मानना ही पड़ेगा कि बंगलादेश और पाकिस्तान हमेशा एक थे। दोनों इस्लामिक देश हैं, विचारधारा से भिन्न हो ही नहीं सकते। पाकिस्तान और बंगलादेश मिलकर हिंदुस्तान को एक इस्लामिक स्टेट बनाना चाहते हैं, इसलिए दोनों देश एकजुट होकर भारत पर हमलावर हैं। हिंदुस्तान में जनसंख्या का संतुलन बिगड़ गया है। 

शेख मुजीब-उर-रहमान, जिन्हें हम भारत का परममित्र मानते हैं, स्वयं कहते थे कि पूर्वी बंगाल (यानी बंगलादेश) की जनसंख्या चिंताजनक गति से बढ़ रही है। बंगलादेश के निवासियों को भूमि की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बंगलादेश को भूमि की आवश्यकता है। भारत के ‘असम’ में बंगलादेशीयों को बसा कर बंगलादेश की जनसंख्या में संतुलन लाया जा सकता है। सचमुच असम को बंगलादेश में शामिल कर दिया जाना चाहिए। अगर भारत के ‘परम मित्र’ शेख मुजीब-उर-रहमान की सोच यह हो सकती है, तो फिर प्रधानमंत्री खालिदा जिया को भारत विरोधी क्यों कहें? उनके पति जिया-उर-रहमान, सेना के जनरल और राष्ट्रपति को भारत विरोधी नहीं ठहराना चाहिए क्योंकि शेख मुजीब-उर-रहमान को बंगलादेश का संस्थापक भारत की ‘आयरन लेडी’ भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने बनाया था। 

1951 में भारत में मुसलमानों की जनसंख्या 9.9 प्रतिशत थी। 1971 में यह 10.8 प्रतिशत हो गई, 1981 में बढ़कर 11.3 प्रतिशत और 1991 में यह आंकड़ा 12.1 प्रतिशत पर पहुंच गया। असम में मुसलमानों की आबादी 28 प्रतिशत है, पश्चिम बंगाल में 25 प्रतिशत। 1991 में पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों दक्षिण और उत्तर 24 परगना में मुस्लिमों की जनसंख्या 56 प्रतिशत थी। नादिया जिले में यह 48 प्रतिशत, मुर्शिदाबाद में 52 प्रतिशत, मालदा जिले में 54 प्रतिशत और पश्चिमी दिनाजपुर और इस्लामपुर में 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। गांवों में ‘बंगलादेशी’ प्रवासियों की ओर ध्यान देने का नतीजा यह हुआ कि देहात से बहुसंख्यक समुदाय शहरों को पलायन कर गया।  चिंतनीय है। जहां भी कोई क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य वाला हुआ, वहां दंगे-फसाद शुरू हो गए। जनरल सिन्हा ने असम में हिंदू और मुसलमानों की जनसंख्या में वृद्धि के अंतर की ओर हमारा ध्यान खींचते हुए बताया कि 1951-61 के दशक में हिंदुओं की जनसंख्या 33.7 प्रतिशत बढ़ी, वहीं मुस्लिम आबादी 38.3 प्रतिशत बढ़ गई। 

1981-91 के दशक में हिंदुओं की जनसंख्या जहां 41.9 प्रतिशत बढ़ी, मुस्लिम आबादी 77.4 प्रतिशत बढ़ गई। 1971 से लेकर 1991 के बीच असम में मुस्लिम आबादी 77.42 प्रतिशत हो गई। असम में 1951 से लेकर 1991 के बीच मुस्लिम जनसंख्या 77.42 प्रतिशत बढ़ी, वहीं हिंदुओं की जनसंख्या 41.84 प्रतिशत रह गई। 1951 से 1991 के बीच मुस्लिम आबादी 24.68 प्रतिशत हो गई। 

संवेदनशील क्षेत्रों में मुस्लिम ‘बंगलादेशी’ अवैध प्रवासी अधिक संख्या में बस रहे हैं। बंगलादेश और पाकिस्तान की नीयत खोटी है। सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देश धड़ाधड़ इन दोनों भारत विरोधी देशों को पैसा, विस्फोटक सामग्री और हथियार भेज रहे हैं, जो पाकिस्तानी खुफिया एजैंसी आई.एस.आई. नेपाल के रास्ते बंगलादेश पहुंचा रही है और बंगलादेश अवैध प्रवासियों की हथियारों सहित असम और पश्चिम बंगाल में घुसपैठ करवा रहा है। भारत और बंगलादेश की 4000 किलोमीटर सीमा रेखा आपस में मिलती है। इसलिए मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड अस्थिरता और हिंसा के दौर से गुजर रहे हैं। अमरीका पाकिस्तान की पीठ ठोक रहा है। 

हिंदुस्तान बंगलादेश और पाकिस्तान की आई.एस.आई. से बच सकता है यदि ‘आप्रेशन सिंदूर’ को जारी रखा जाए। भारत-बंगलादेश की सीमाओं पर तार बिछा दी जाए। भारत अपनी गुप्तचर एजैंसियों पर कड़ी नजर रखे। भारत के भीतर और बाहरी जासूसों के जाल को छिन्न-भिन्न करना होगा।  पाकिस्तान और बंगलादेश अब दो देश नहीं, एक हैं, अत: भारत जाग जाए।-मा. मोहन लाल(पूर्व परिवहन मंत्री, पंजाब)

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