टी.वी. समाचार चैनलों की सिकुड़ती दुनिया

Edited By Updated: 23 Apr, 2026 05:04 AM

the shrinking world of tv news channels

2020  : ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काऊंसिल (बी.ए.आर.सी.) ने कुछ चैनलों द्वारा सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करते पकड़े जाने के बाद, 3 महीने के लिए समाचार चैनलों की रेटिंग रोक दी थी। ‘खराब प्रदर्शन करने वालों’ को लेकर उद्योग-व्यापी चर्चा और कई...

2020  : ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काऊंसिल (बी.ए.आर.सी.) ने कुछ चैनलों द्वारा सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करते पकड़े जाने के बाद, 3 महीने के लिए समाचार चैनलों की रेटिंग रोक दी थी। ‘खराब प्रदर्शन करने वालों’ को लेकर उद्योग-व्यापी चर्चा और कई बदलावों के बाद, 17 महीने बाद रेटिंग फिर से शुरू हुई।

2026 : 6 मार्च को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बी.ए.आर.सी. को 4 सप्ताह के लिए समाचार चैनलों की रेटिंग रिपोॄटग रोकने का निर्देश दिया। यह ईरान पर अमरीका-इसराईल के हमले की सामान्य से अधिक कवरेज के मद्देनजर किया गया था।  एक बड़ी मीडिया प्लानिंग एजैंसी के प्रमुख ने कहा, ‘‘एकल-अंक (7 प्रतिशत से कम) व्यूअरशिप शेयर के साथ, समाचार अब रीच (पहुंच) का माध्यम नहीं रह गया है। इसलिए, एजैंसियों और क्लाइंट्स पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सी.टी.वी. (कनैक्टेड टी.वी.) और डिजिटल मैट्रिक्स उपलब्ध होने के कारण, बी.ए.आर.सी. रेटिंग अब कम महत्वपूर्ण है।’’ भारत के सबसे बड़े विज्ञापनदाताओं में से एक के वरिष्ठ प्रबंधक ने कहा, ‘‘टी.वी. पर हमारी निर्भरता कम हो गई है और एक शैली के रूप में समाचारों में भारी गिरावट आई है।’’

यही पहला कारण है कि मंत्रालय द्वारा निजी व्यवसाय के लिए मैट्रिक्स रोकने के खिलाफ कोई विरोध नहीं हुआ। लीनियर टैलीविजन, जिसका प्रतिनिधित्व समाचार चैनल करते हैं, एक सिकुड़ते ब्रह्मांड का हिस्सा है। 2019 में, 210 मिलियन भारतीय घरों में टैलीविजन सैट था, यानी लगभग 900 मिलियन की दर्शक संख्या। ये मुख्य रूप से डायरैक्ट-टू-होम (डी.टी.एच.) या केबल वाले घर थे। महामारी और स्ट्रीमिंग के उदय के कारण, यह संख्या घटकर 157 मिलियन घर रह गई है, जो 659 मिलियन लोगों तक पहुंचती है। इसे थोड़ा और विस्तार से समझें। उन 157 मिलियन घरों में से आधे से कम डी.डी. फ्री डिश (राज्य प्रसारक की एक मुफ्त डी.टी.एच. सेवा) पर हैं। शेष 92 मिलियन घरों में केबल/डी.टी.एच. और कनैक्टेड टी.वी. का संयोजन है या इनमें से केवल एक है। ऑडियंस की अधिकांश वृद्धि डी.डी. फ्री डिश या यूट्यूब देखने वाले लोगों से आ रही है। ध्यान दें, ये 2025 की शुरुआत के आंकड़े हैं। एक उद्योग विशेषज्ञ का कहना है कि तब से इनमें और गिरावट आई होगी।

‘इं.टु.’ ग्रुप के मुख्य विपणन अधिकारी और मुख्य परिचालन अधिकारी विवेक मल्होत्रा का मानना है, ‘‘हम विज्ञापन खर्च का डिजिटल की ओर स्वाभाविक पलायन देख रहे हैं क्योंकि उपभोक्ताओं की आदतें विकसित हो रही हैं। एक अद्यतन सर्वेक्षण लीनियर टी.वी. के वर्तमान परिदृश्य का अधिक सटीक प्रतिङ्क्षबब प्रदान कर सकता है।’’ यह जल्द ही हो सकता है। 27 मार्च को सरकार एक ‘टी.वी. रेटिंग नीति 2026’ लेकर आई, जो सभी प्लेटफार्मों-केबल, डी.टी.एच. और स्ट्रीमिंग को अपना स्वयं का व्यूअरशिप डाटा प्रकाशित करने की अनुमति देती है।
सिकुड़ते टी.वी. ब्रह्मांड के भीतर, समाचार एक बहुत ही छोटा हिस्सा है। समाचार चैनल भारत में देखे जाने वाले कुल टी.वी. का 7 प्रतिशत से भी कम हिस्सा बनाते हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि सिकुड़ते टी.वी. विज्ञापन बजट में विज्ञापन राजस्व लगभग 4,000 करोड़ रुपए से गिरकर अनुमानित 3,000 करोड़ रुपए रह गया है। ध्यान दें कि यह टैलीविजन स्क्रीन या समाचार का प्रतिङ्क्षबब नहीं, बल्कि ‘लीनियर टी.वी. बनाम ऑन-डिमांड’ सेवाओं (जैसे यूट्यूब और नैटफ्लिक्स) का परिणाम है।

मल्होत्रा कहते हैं, ‘‘सभी प्रोग्रामिंग शैलियों में से, खेल और समाचार ने एक अनूठा लचीलापन दिखाया है। वे लीनियर और डिजिटल के बीच संक्रमण को सफलतापूर्वक नेविगेट कर रहे हैं और मनोरंजन के विपरीत सभी प्लेटफार्मों पर दर्शकों के साथ एक सर्वव्यापी जुड़ाव बनाए रख रहे हैं।’’ इसका मतलब है कि स्टार स्पोटर््स पर क्रिकेट मैच देखने वाला दर्शक जियो हॉटस्टार पर भी जाएगा। लेकिन जो स्टार प्लस पर सोप ओपेरा ‘अनुपमा’ देखता है, वह जरूरी नहीं कि जियो हॉटस्टार पर जाए। यदि उन्हें लीनियर टी.वी. से शिफ्ट होना पड़ा, तो वे नैटफ्लिक्स या अमेजन प्राइम वीडियो या किसी अन्य ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं। दूसरा, डिजिटल युग में रेटिंग अप्रासंगिक हो गई है, क्योंकि विज्ञापन अब ‘परफॉरमैंस-ड्रिवन’ (प्रदर्शन-आधारित) हो गया है। विज्ञापनदाताओं ने समाचार दर्शकों को लक्षित करने के लिए सी.टी.वी. और अन्य उपकरणों का उपयोग करने के सही तरीके खोज लिए हैं।

डाबर के मार्केटिंग प्रमुख राजीव दुबे कहते हैं, ‘‘विज्ञापन के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। समाचार चैनल, उदाहरण के लिए, समय के साथ असाधारण पहुंच बनाते हैं लेकिन धैर्य और निरंतर विज्ञापन ही कुंजी है।’’ रेटिंग छोटे विज्ञापनदाताओं के लिए मायने रखती है, जो विशिष्ट बाजारों में काम करते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनकी पहुंच सबसे अच्छी हो।-वनिता कोहली-खांडेकर

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!