अविश्वास प्रस्तावों की कहानी

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 05:01 AM

the story of no confidence motions

विपक्ष के 128 लोकसभा सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए एक नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि उन्होंने नियम 94सी के तहत लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का...

विपक्ष के 128 लोकसभा सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए एक नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि उन्होंने नियम 94सी के तहत लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। अब तक लोकसभा में 27 बार अविश्वास प्रस्ताव रखे जा चुके हैं। लोकसभा में सबसे पहला अविश्वास प्रस्ताव अगस्त 1963 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार के विरुद्ध जे.बी. कृपालानी ने पेश किया था। लेकिन विपक्ष सरकार गिराने में नाकाम हो गया था, क्योंकि इस प्रस्ताव के पक्ष में केवल 62 वोट और विरोध में 347 वोट पड़े थे। 

लेकिन 1978 में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव ने मोरारजी देसाई की सरकार को गिरा दिया था। अब तक सर्वाधिक 4 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का रिकॉर्ड माकपा सांसद ज्योतिर्मय बसु के नाम है। उन्होंने अपने चारों प्रस्ताव इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध रखे थे। सर्वाधिक अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने वाली भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार रही है। इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध 15 अविश्वास प्रस्ताव पेश किए गए थे। इसके अलावा पी.वी. नरसिम्हा राव और लाल बहादुर शास्त्री की सरकारों ने 3-3 बार अविश्वास प्रस्तावों का सामना किया था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार इंदिरा गांधी की सरकार और दूसरी बार पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। संयोग की बात है कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के विरुद्ध भी 1996 व 1998 में दो बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था और वह दोनों बार हार गए थे। सन 2018 में नरेंद्र मोदी की सरकार के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन यह प्रस्ताव गिर गया था।

लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला पर आरोप है कि वह विपक्ष के साथ भेदभाव करते हैं और सांसदों को बोलने का मौका कम देते हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब किसी लोकसभाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा हो। संसद के इतिहास में कई बार ऐसा हो चुका है। 
अविश्वास प्रस्ताव भारतीय संसदीय परंपरा का ही एक हिस्सा है। जब भी विपक्ष को सरकार या फिर लोकसभाध्यक्ष पर भरोसा नहीं होता है तो उन्हें हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है। लोकसभाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लाया जाता है, इसे ‘मोशन ऑफ रिमूवल’ कहा जाता है। इसके तहत लोकसभा के अध्यक्ष को हटाया जा सकता है। वोटिंग में बहुमत मिलने पर अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। 

भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार सन 1954 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। लोकसभा के पहले अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर के खिलाफ यह प्रस्ताव लाया गया था। सोशलिस्ट पार्टी के नेता विघ्नेश्वर मिसिर यह प्रस्ताव लाए थे। इस प्रस्ताव पर लगभग दो घंटे तक चर्चा हुई थी, हालांकि बाद में उसे खारिज कर दिया गया। इस प्रस्ताव को जवाहर लाल नेहरू ने सदन की गरिमा का सवाल बताया था। सन 1954 के बाद लोकसभाध्यक्ष के विरुद्ध दूसरा प्रस्ताव 1966 में हुकम सिंह के विरुद्ध लाया गया। वहीं तीसरी बार 1987 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। पिछले तमाम प्रस्तावों की तरह यह अविश्वास प्रस्ताव भी खारिज हो गया था। अब देखना यह है कि ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव कितना चल पाता है, इससे लोकसभाध्यक्ष की कुर्सी जाती है या फिर यह प्रस्ताव धड़ाम गिरता है। फिलहाल तो संख्या बल देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि ओम बिरला की कुर्सी जाएगी, बाकी आने वाला वक्त बताएगा।-डा. रमेश सैनी 

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