अपनी नई भूमिका निभाने के लिए लालायित हैं महिलाएं

Edited By Updated: 26 Sep, 2023 06:05 AM

women are eager to play their new role

20 सितंबर 2023 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक संसद में पेश करके इस दिन को ऐतिहासिक बना दिया। संविधान में 128वां संशोधन करने के लिए मोदी सरकार के कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने इस बिल को पेश किया और प्रधानमंत्री...

20 सितंबर 2023 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक संसद में पेश करके इस दिन को ऐतिहासिक बना दिया। संविधान में 128वां संशोधन करने के लिए मोदी सरकार के कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने इस बिल को पेश किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कार्य-कुशलता से इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित करवा लिया। 

अब महामहिम राष्ट्रपति की मोहर के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। ‘मोदी हैं-तो मुमकिन है’ के नारे को अमली जामा पहनाते हुए केंद्र सरकार ने संसद के नए भवन से पहला विधेयक पेश कर देश की आधी आबादी को यह नायाब तोहफा दिया है। तमाम बाधाओं और अड़चनों को पार करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में उभरे हैं। इस विधेयक के दोनों सदनों में पारित होने के बाद देश के प्रधानमंत्री की छवि एक सर्वसमावेशी और सर्वहित पोषक की बनी है। 

भारतीय जनता पार्टी प्रारंभ से ही महिला आरक्षण या यूं कहें महिला सम्मान व सशक्तिकरण की समर्थक रही है। इसलिए भाजपा ने अपनी पार्टी में नई शुरूआत केंद्र, प्रदेश, जिला, मंडल और मतदान केंद्र तक 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित करके कई वर्ष पूर्व कर दी थी। भाजपा ने अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को पूरा करके देश की महिलाओं की सहभागिता को राष्ट्र निर्माण में सहयोगी बनकर पूरा किया है। लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा के दौरान सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टी को महिला हितों में बताकर इसका श्रेय लेने का प्रयास किया। समय-समय पर केंद्र की विभिन्न सरकारों ने इस बिल को ‘संसद’ में पास करवाने का प्रयास किया। लेकिन अलग-अलग कारणों से यह बिल पास नहीं हो पाया। समाज के विकास में महिला बराबर की भूमिका से वंचित थी। 

महिला को समान अवसर मिले यह देश की आम महिला का अधिकार है। 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद देश के निर्माण और निर्णय में सहभागिता देश की महिलाओं की हो, इसी लक्ष्य को पूरा करने हेतु 20 सितंबर को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक पेश किया गया। मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की महिला सम्मान व सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्धता के कारण ही देश की महिलाओं का यह सपना साकार हो पाया है। देश के सभी राजनीतिक दलों के समर्थन से यह महिला आरक्षण विधेयक पारित हो गया यह सुखद पहलू है। महिला आरक्षण विधेयक पारित हो जाने के बाद के कई प्रश्न भी हैं कि यह बिल कब लागू होगा। पहले जनगणना, डिलिमिटेशन और फिर सीट आरक्षण, कुछ दल ओ.बी.सी. आरक्षण की बात भी कर रहे हैं। यह बात पूर्ण रूप से कानून सम्मत है कि बिल को अमली जामा पहनाने से पहले एक निश्चित प्रणाली से गुजरना पड़ेगा और उसके बाद ही यह विधेयक अक्षरश: लागू होगा। 

कानून लागू करने या होने की एक निश्चित संवैधानिक व कानूनी प्रक्रिया है। उसको पूरा करने के लिए केंद्र सरकार संकल्पित है। केंद्र सरकार पर शक करके विपक्ष अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। देश के प्रधानमंत्री ने नेक नीयत से समाज में महिलाओं को सम्मान देकर एक अच्छी व पवित्र पहल की है। अगर विपक्ष को लगता है कि इसमें कुछ कमी या त्रुटि रह गई है तो उनको संंसद में संशोधित करा सकती है। लेकिन इस तरह अनावश्यक प्रश्न खड़े करके विपक्ष के लोग महिला आरक्षण व सम्मान के विरोधी प्रतीत हो रहे हैं जो इस देश की महिला शक्ति का अपमान है। नारी शक्ति बंधन विधेयक के पारित हो जाने के उपरांत इस देश की आम महिला का हौसला और आत्मविश्वास आसमान पर है। वह उत्साह और नए जोश के साथ राष्ट्र के प्रत्येक कार्य में पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़कर अपनी नई भूमिका को निभाने के लिए लालायित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेक नीयत से निकला यह पवित्र और ऐतिहासिक निर्णय देश और समाज का भाग्य बदलने वाला साबित होगा।(लेखक हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के ओ.एस.डी. रहे हैं।)-महेंद्र धर्मानी

Related Story

    Trending Topics

    IPL
    Royal Challengers Bengaluru

    190/9

    20.0

    Punjab Kings

    184/7

    20.0

    Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

    RR 9.50
    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!