Edited By jyoti choudhary,Updated: 20 Jan, 2026 11:04 AM

देश के वायदा बाजार से लेकर दिल्ली सर्राफा बाजार तक चांदी की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड पर बनी हुई हैं। रिकॉर्ड रैली अब निवेशकों के लिए खतरे की घंटी बनती दिख रही है। लगातार नई ऊंचाइयों को छूने के बाद एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतें ओवरवैल्यूड...
बिजनेस डेस्कः देश के वायदा बाजार से लेकर दिल्ली सर्राफा बाजार तक चांदी की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड पर बनी हुई हैं। रिकॉर्ड रैली अब निवेशकों के लिए खतरे की घंटी बनती दिख रही है। लगातार नई ऊंचाइयों को छूने के बाद एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतें ओवरवैल्यूड जोन में पहुंच चुकी हैं और आने वाले दिनों में इसमें तेज करेक्शन देखने को मिल सकता है। जानकारों के मुताबिक मौजूदा स्तरों से चांदी के दाम 1 लाख रुपए तक टूट सकते हैं।
जानकारों का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट में चांदी का टारगेट 100 डॉलर प्रति औंस और घरेलू वायदा बाजार में 3.25 से 3.30 लाख रुपए प्रति किलो का लेवल तय किया गया है। अगर चांदी इन टारगेट लेवल्स तक पहुंचती है, तो इसके बाद कीमतों में 30 फीसदी या उससे ज्यादा की गिरावट देखने को मिल सकती है।
टैरिफ टेंशन से बढ़ी तेजी, राहत से दबाव संभव
एक्सपर्ट्स के अनुसार मौजूदा तेजी का बड़ा कारण अमेरिका की टैरिफ नीति से जुड़ी अनिश्चितता है। हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूरोपीय देशों पर ग्रीनलैंड टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद निवेशकों ने सेफ-हेवन एसेट्स की ओर रुख किया। हालांकि जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन टैरिफ्स पर दबाव बढ़ सकता है और राहत मिलने की स्थिति में चांदी की कीमतों पर दबाव आएगा।
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डॉलर इंडेक्स और मुनाफावसूली बन सकते हैं ट्रिगर
डॉलर इंडेक्स में संभावित मजबूती भी चांदी की कीमतों को नीचे खींच सकती है। बीते एक महीने में डॉलर इंडेक्स में रिकवरी देखने को मिली है और आगे इसमें और तेजी की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचने के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली भी कीमतों में तेज गिरावट का कारण बन सकती है।
रिप्लेसमेंट थ्योरी और गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का असर
जानकारों के मुताबिक चांदी के महंगे होने के चलते निवेशकों और इंडस्ट्रियल यूजर्स का रुझान अब कॉपर और एल्यूमिनियम जैसे दूसरे मेटल्स की ओर बढ़ सकता है। गोल्ड-सिल्वर रेश्यो भी इस समय 14 साल के निचले स्तर पर है, जिसके ऊपर जाने की संभावना जताई जा रही है—यह भी चांदी के लिए नेगेटिव संकेत माना जा रहा है।
एक महीने में 54% उछाल, करेक्शन की पूरी गुंजाइश
पिछले एक महीने में चांदी की कीमतों में करीब 54 फीसदी की तेजी आई है। 17 दिसंबर को जहां चांदी पहली बार 2 लाख रुपए के ऊपर बंद हुई थी, वहीं 19 जनवरी को यह 3 लाख रुपए के पार पहुंच गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तेज उछाल के बाद चांदी के भाव 1 लाख रुपए या उससे ज्यादा टूटकर 2.30 लाख रुपए के स्तर तक भी आ सकते हैं।
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1980 और 2011 जैसी गिरावट की चेतावनी
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि इतिहास गवाह है कि चांदी में इस तरह की तेज तेजी के बाद भारी गिरावट देखी गई है। 1980 में चांदी के दाम 50 डॉलर पर पहुंचने के बाद दो महीनों में 70 फीसदी टूट गए थे, जबकि 2011 में भी 32 फीसदी की गिरावट आई थी। उनके मुताबिक इस बार भी 3.25–3.30 लाख रुपए के आसपास चांदी टॉप बना सकती है, जिसके बाद बड़ा करेक्शन संभव है।
मौजूदा भाव
MCX पर चांदी ने कारोबार के दौरान 3.19 लाख रुपए प्रति किलो का लाइफटाइम हाई छुआ। खबर लिखे जाने तक चांदी 3.17 लाख रुपए के आसपास कारोबार कर रही थी। जनवरी महीने में ही चांदी के दाम करीब 84 हजार रुपए बढ़ चुके हैं।