Edited By jyoti choudhary,Updated: 28 Feb, 2026 03:46 PM

मध्यपूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। Israel द्वारा Iran पर सैन्य कार्रवाई किए जाने के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में...
बिजनेस डेस्कः मध्यपूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। Israel द्वारा Iran पर सैन्य कार्रवाई किए जाने के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है और निवेशकों की चिंता गहरा दी है।
2 मार्च को बाजारों में गिरावट की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि 2 मार्च को दुनिया के प्रमुख शेयर बाजारों—अमेरिका, भारत और एशियाई बाजारों—में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। वेल्थमिल सिक्योरिटीज के इक्विटी स्ट्रेटेजिस्ट क्रांति बाथिनी के अनुसार, जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति तेज हो जाती है, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ता है। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि यह सीमित सैन्य टकराव है या लंबा खिंचने वाला युद्ध।
क्रूड ऑयल में तेजी, भारत पर बढ़ेगा दबाव
इस तनाव का सबसे तात्कालिक असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है और कीमत लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाता है तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल की कीमतों में उछाल से चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव आ सकता है।
भारतीय बाजार पहले से दबाव में
एनरिच मनी के सीईओ पोनुमुदी आर का कहना है कि भारत जैसे बड़े क्रूड आयातक देश के लिए मध्यपूर्व में बढ़ता तनाव चिंताजनक है। फरवरी में पहले ही भारतीय शेयर बाजारों में कमजोरी देखी जा चुकी है, ऐसे में नया भू-राजनीतिक झटका बाजार की धारणा को और कमजोर कर सकता है।
कच्चे तेल में तेजी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम ऊपर जाते हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, पेंट निर्माताओं और एविएशन कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। विमानन क्षेत्र में एविएशन टरबाइन फ्यूल महंगा होने से हवाई किराए बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा, यदि एयरलाइंस मध्यपूर्व के हवाई मार्गों से बचती हैं तो उड़ानों की दूरी और लागत दोनों बढ़ सकती हैं, जिसका बोझ यात्रियों पर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी
विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, इसलिए बड़ी पोजीशन लेने से पहले जोखिम का आकलन जरूरी है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इसी पर बाजार की अगली चाल निर्भर करेगी। फिलहाल दोनों देशों का रुख आक्रामक नजर आ रहा है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।