सहारा को बड़ा झटका! SAT ने ₹14,000 करोड़ लौटाने का आदेश बरकरार रखा

Edited By Updated: 10 Mar, 2026 06:13 PM

big blow to sahara sat upholds order to refund 14 000 crore

सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने सहारा समूह से जुड़े एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सहारा की कंपनी को निवेशकों से जुटाए गए करीब 14,000 करोड़...

बिजनेस डेस्कः सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने सहारा समूह से जुड़े एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सहारा की कंपनी को निवेशकों से जुटाए गए करीब 14,000 करोड़ रुपए लौटाने के लिए कहा गया था।

यह मामला ऑप्शनली फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर (OFCD) के जरिए जुटाए गए फंड से जुड़ा है। सहारा समूह ने 1998 से 2008 के बीच इस योजना के तहत बड़ी संख्या में निवेशकों से पैसा जुटाया था। सेबी का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर लोगों से पैसा जुटाना पब्लिक इश्यू के दायरे में आता है, जिसके लिए नियामक की मंजूरी और नियमों का पालन जरूरी होता है।

सेबी के अनुसार अगर 50 या उससे अधिक लोगों से निवेश लिया जाता है तो उसे सार्वजनिक निवेश माना जाता है और इसके लिए आईपीओ प्रक्रिया अपनानी होती है लेकिन सहारा ने बिना सेबी की मंजूरी के करीब 1.98 करोड़ निवेशकों से पैसा जुटाया, जो नियमों का उल्लंघन है।

सहारा का क्या है कहना 

सहारा का तर्क है कि यह पैसा प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए कुछ चुनिंदा निवेशकों से लिया गया था। कंपनी का दावा है कि उसने लगभग पूरी रकम निवेशकों को लौटा दी है और करीब 17 करोड़ रुपए ही बाकी हैं। सहारा के अनुसार उसने लगभग 8,157 करोड़ रुपए नकद लौटाए और करीब 4,400 करोड़ रुपए के शेयर जारी करके निवेशकों को भुगतान किया।

हालांकि सेबी ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं। नियामक का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर नकद भुगतान के पुख्ता सबूत नहीं हैं और शेयर में भुगतान की प्रक्रिया भी संदिग्ध लगती है। सेबी ने यह भी कहा कि सहारा ने निवेशकों की पूरी सूची भी उपलब्ध नहीं कराई है, जिससे भुगतान के दावों की पुष्टि करना मुश्किल है।

कोर्ट का फैसला

ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि जब लगभग दो करोड़ लोगों से पैसा जुटाया गया हो तो इसे प्राइवेट निवेश नहीं माना जा सकता। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सेबी को 1992 से सार्वजनिक निवेश से जुड़े मामलों की जांच का अधिकार है। अब इस फैसले के बाद सहारा को सेबी के निर्देश के अनुसार रकम जमा करनी होगी। इसके बाद सेबी निवेशकों की पहचान और दस्तावेजों की जांच के आधार पर उन्हें पैसा वापस करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। हालांकि सहारा के पास अभी भी सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देने का विकल्प मौजूद है।
 

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