गुजरात की केमिकल उद्योग पर मंडराया बड़ा संकट, खतरे में 1000 फैक्ट्रियां! क्या है पूरा मामला?

Edited By Updated: 09 Mar, 2026 04:55 PM

gujarat s industries are in turmoil many factories are closed

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा का असर अब भारत के औद्योगिक सेक्टर पर भी दिखने लगा है। खास तौर पर गुजरात का केमिकल उद्योग इससे प्रभावित हो रहा है, जो बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। खाड़ी देशों से गैस की सप्लाई

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा का असर अब भारत के औद्योगिक सेक्टर पर भी दिखने लगा है। खास तौर पर गुजरात का केमिकल उद्योग इससे प्रभावित हो रहा है, जो बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। खाड़ी देशों से गैस की सप्लाई बाधित होने और कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण कई फैक्ट्रियों को उत्पादन घटाना पड़ा है, जबकि कुछ इकाइयों ने अस्थायी रूप से काम बंद कर दिया है।

गैस महंगी होने से बढ़ी मुश्किलें

गुजरात में करीब 1,000 केमिकल फैक्ट्रियां प्राकृतिक गैस पर चलती हैं। गैस सप्लाई करने वाली कंपनी अडानी टोटल गैस ने उद्योगों को जानकारी दी है कि अब कुल खपत का केवल 40% गैस ही पुराने दाम 57 रुपए प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) पर उपलब्ध होगी। इसके बाद की खपत पर कंपनियों को 119 रुपए प्रति SCM की दर से भुगतान करना होगा। गैस की लागत बढ़ने से उद्योगों का उत्पादन खर्च तेजी से बढ़ गया है।

उत्पादन में कटौती शुरू

अवनी डायकेम के प्रमोटर योगेश परिख के अनुसार गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण उनकी कंपनी को उत्पादन में बड़ी कटौती करनी पड़ी है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो फैक्ट्री का संचालन जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

निर्यात पर भी पड़ सकता है असर

भारत का केमिकल उद्योग करीब 220 अरब डॉलर का है, जिसमें से लगभग 60% उत्पादन निर्यात किया जाता है। हाल के दिनों में रसायनों के कच्चे माल की कीमतें भी 10% से 40% तक बढ़ गई हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारतीय केमिकल सेक्टर की लागत और प्रतिस्पर्धा दोनों पर असर पड़ सकता है।

फैक्ट्रियों के बंद होने का खतरा

केमिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CHEMEXCIL) गुजरात के प्रेसिडेंट भूपेंद्र पटेल के मुताबिक अभी तक करीब 15% फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। यदि गैस की आपूर्ति और कीमतों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में और यूनिट्स बंद होने का खतरा है।

मजदूरों के रोजगार पर संकट

इस संकट का असर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है। कई फैक्ट्रियों में स्थायी कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में कॉन्ट्रैक्ट वर्कर भी काम करते हैं। उत्पादन कम होने और इकाइयों के बंद होने से हजारों मजदूरों के रोजगार पर भी खतरा मंडराने लगा है।

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