Edited By jyoti choudhary,Updated: 25 Feb, 2026 06:19 PM

भारत में ई-कॉमर्स के तेजी से विस्तार ने ब्रांड बनाने की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि अब कंपनियां सालाना 100 करोड़ रुपए का राजस्व पहले की तुलना में कहीं कम समय में हासिल कर रही हैं। जहां पहले इस स्तर तक पहुंचने में...
बिजनेस डेस्कः भारत में ई-कॉमर्स के तेजी से विस्तार ने ब्रांड बनाने की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि अब कंपनियां सालाना 100 करोड़ रुपए का राजस्व पहले की तुलना में कहीं कम समय में हासिल कर रही हैं। जहां पहले इस स्तर तक पहुंचने में औसतन 11 साल लगते थे, अब यह अवधि घटकर करीब 7 साल रह गई है।
डिजिटल मॉडल बना तेजी की असली वजह
रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित बिजनेस मॉडल इस बदलाव की मुख्य ताकत हैं। कंपनियां अब तेजी से नए प्रोडक्ट लॉन्च कर रही हैं, ग्राहकों के फीडबैक के आधार पर तुरंत सुधार कर रही हैं और ऑनलाइन चैनलों को ही अपनी प्रमुख बिक्री रणनीति बना रही हैं। पहले बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क खड़ा करना महंगा और समय लेने वाला काम था लेकिन ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स ने सीधे ग्राहकों तक पहुंच को आसान और किफायती बना दिया है।
ऑनलाइन ब्रांड्स की तेज इनोवेशन
जो ब्रांड मुख्य रूप से ऑनलाइन बिक्री पर निर्भर हैं, वे ऑफलाइन कंपनियों की तुलना में 1.5 से 3 गुना अधिक नए प्रोडक्ट बाजार में उतार रहे हैं। इससे उन्हें ट्रेंड्स को जल्दी अपनाने और कम जोखिम में नए उत्पादों का परीक्षण करने का अवसर मिल रहा है।
ब्यूटी और पर्सनल केयर सेगमेंट में यह अंतर सबसे ज्यादा दिखाई देता है। 2021 से 2025 के बीच ऑनलाइन ब्रांड्स ने लगभग 60 नए उत्पाद लॉन्च किए, जबकि ऑफलाइन कंपनियों ने करीब 20 ही उतारे। फूड और फ्रेश कैटेगरी में भी ऑनलाइन कंपनियां 45 से 50 नए उत्पाद बाजार में लाई हैं, जो ऑफलाइन ब्रांड्स से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा है।
तेजी से बढ़ते बाजार में नए अवसर
तेज प्रोडक्ट लॉन्चिंग के साथ कंपनियों को ग्राहकों से तुरंत फीडबैक, बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट और रियल-टाइम डेटा एनालिसिस का लाभ मिल रहा है। यही वजह है कि डिजिटल ब्रांड्स तेजी से बदलते बाजार में मजबूत पकड़ बना रहे हैं और कम समय में बड़ी आय का लक्ष्य हासिल कर रहे हैं।