Edited By jyoti choudhary,Updated: 18 May, 2026 12:00 PM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। निवेशकों को आशंका है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो...
बिजनेस डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। निवेशकों को आशंका है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.3% बढ़कर 110.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.7% की तेजी के साथ 107.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
भारत पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी, जिसे विशेषज्ञ ईरान पर अमेरिकी हमलों और पश्चिम एशिया संकट से जोड़कर देख रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100-120 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं, तो आम लोगों पर ईंधन महंगा होने का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल और महंगे होने के संकेत
15 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। Kotak Institutional Equities की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में 15-20% तक और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि कीमतें स्थिर रखने की वजह से सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 15-20 रुपए प्रति लीटर तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी संभव है।