Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Feb, 2026 05:11 PM

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन पद पर लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर फैसला टलने से समूह के भीतर शीर्ष स्तर पर मतभेद से जुड़ी अटकलें तेज हो गई हैं। टाटा संस के निदेशक मंडल की मंगलवार को हुई बैठक में...
नई दिल्लीः टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन पद पर लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर फैसला टलने से समूह के भीतर शीर्ष स्तर पर मतभेद से जुड़ी अटकलें तेज हो गई हैं। टाटा संस के निदेशक मंडल की मंगलवार को हुई बैठक में चंद्रशेखरन को एक और कार्यकाल देने के प्रस्ताव पर फैसला टाल दिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट ने पिछले साल सर्वसम्मति से उन्हें तीसरा कार्यकाल देने की सिफारिश की थी।
टाटा समूह से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखने वाले पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह निर्णय स्थगित होने से टाटा ट्रस्ट के उस सर्वसम्मत प्रस्ताव की स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति को लेकर कुछ शर्तें रखी थीं। बताया जाता है कि उन्होंने समूह की कुछ कंपनियों, विशेषकर एयर इंडिया में हो रहे घाटे पर चिंता जताई। एयर इंडिया का अधिग्रहण 2022 में किया गया था और कंपनी को पुनर्गठित करने की प्रक्रिया अभी तक जारी है। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर और बैटरी विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों में भारी पूंजीगत व्यय से जुड़े जोखिमों पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
सूत्रों ने यह भी कहा कि नियामकीय बाध्यता की वजह से टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने को लेकर भी निदेशक मंडल में आशंका जताई गई और इस संबंध में स्पष्ट आश्वासन मांगा गया। मामले से परिचित एक सूत्र ने कहा, "टाटा ट्रस्ट का सर्वसम्मत प्रस्ताव स्पष्ट रूप से कायम है और उसे उचित समय पर लागू किया जाएगा।" हालांकि, एक अन्य पर्यवेक्षक ने सवाल उठाया कि क्या ट्रस्ट के नामित निदेशक टाटा संस के निदेशक मंडल में सर्वसम्मति के निर्णय से अलग रुख अपना सकते हैं।
टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में निर्णायक हिस्सेदारी है। टाटा संस 180 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाले टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है, जिसका कारोबार वाहन, इस्पात, सूचना प्रौद्योगिकी, विमानन और उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में फैला हुआ है। पिछले वर्ष टाटा ट्रस्ट के भीतर मतभेद का मामला केंद्र सरकार तक भी पहुंचा था। बाद में सरकार की तरफ से दोनों पक्षों को आपसी मतभेद सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने की सलाह दी गई थी।