Gold Crash: गोल्ड मार्केट में उथल-पुथल, 1983 के बाद सबसे खराब सप्ताह, विशेषज्ञों ने दी निवेशकों को ये सलाह

Edited By Updated: 21 Mar, 2026 01:34 PM

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सोने के लिए यह हफ्ता बेहद कमजोर साबित हो रहा है। 1983 के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है जब गोल्ड इतनी बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के चलते सोने की कीमतों में करीब...

बिजनेस डेस्कः सोने के लिए यह हफ्ता बेहद कमजोर साबित हो रहा है। 1983 के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है जब गोल्ड इतनी बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के चलते सोने की कीमतों में करीब 2.1% की गिरावट दर्ज की गई।

इस गिरावट के पीछे भू-राजनीतिक तनाव भी अहम वजह है। खबरों के अनुसार, अमेरिका ने मध्यपूर्व में अतिरिक्त युद्धपोत और हजारों सैनिक तैनात किए हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। वहीं, बढ़ती महंगाई की आशंका के चलते अब ट्रेडर्स को अक्टूबर तक अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो सोने के लिए नकारात्मक संकेत है।

मध्यपूर्व संकट के बाद से कमजोर पड़ा सोना

आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है लेकिन 28 फरवरी को मध्यपूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने सोने की कीमतों को कमजोर किया है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है।

2022 जैसा ट्रेंड

इतिहास पर नजर डालें तो ऐसा ही रुझान 2022 में भी देखने को मिला था, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ऊर्जा कीमतों में उछाल आया और सोने की कीमतों में लंबे समय तक गिरावट बनी रही। उस दौरान लगातार कई महीनों तक सोना कमजोर रहा था। मौजूदा समय में भी गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ से लगातार तीसरे सप्ताह निवेशकों की निकासी देखी जा रही है।

गिरावट के बावजूद सालभर में बढ़त बरकरार

हालांकि, हालिया गिरावट के बावजूद इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब 5% की बढ़त बनी हुई है। जनवरी के अंत में सोना 5,600 डॉलर के आसपास रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था, जिसे केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और निवेशकों की मजबूत मांग का समर्थन मिला था।

आगे भी जारी रह सकता है उतार-चढ़ाव

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। बढ़ती महंगाई और संभावित ब्याज दरों में वृद्धि के कारण केंद्रीय बैंकों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से सोने की आकर्षण कम हो जाता है, क्योंकि इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

निवेशकों को सलाह

निवेश के नजरिए से विशेषज्ञों ने फिलहाल सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक बाजार में स्थिरता नहीं आती और कीमतों में ठहराव नहीं दिखता, तब तक सोने में गिरावट का दबाव बना रह सकता है।

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