Gold Demand: पीएम मोदी की 'एक साल तक सोना न खरीदने' की अपील का असर, सोने की मांग में जबरदस्त गिरावट

Edited By Updated: 30 May, 2026 01:35 PM

70 decline in gold demand heavy taxes and pm s appeal show significant impact

भारत में सोने की मांग में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। सरकार द्वारा आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में किए गए भारी इजाफे और अन्य वैश्विक एवं घरेलू कारकों के चलते देश के स्वर्ण बाजार में मंदी का माहौल है।

बिजनेस डेस्कः भारत में सोने की मांग में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। सरकार द्वारा आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में किए गए भारी इजाफे और अन्य वैश्विक एवं घरेलू कारकों के चलते देश के स्वर्ण बाजार में मंदी का माहौल है। सरकार ने 13 मई को सोने पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप, जीएसटी सहित प्रभावी टैक्स 9.18% से बढ़कर 18.45% हो गया है।

इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, ड्यूटी बढ़ने के बाद मांग में 70% की गिरावट आई है। 27 मई को समाप्त पखवाड़े में मांग केवल 7.5 टन रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 25 टन थी। मुंबई के स्पॉट मार्केट में 999 शुद्धता वाले सोने का भाव 1.57 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम (बिना जीएसटी) दर्ज किया गया।

मांग घटने के पीछे मुख्य कारण

गिरते रुपए, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए आयात कम करने के लिए शुल्क बढ़ाया गया था। जॉयलुक्कास के चेयरमैन जॉय अलुक्कास के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक साल तक सोना न खरीदने' की अपील का भी ग्राहकों पर गहरा असर पड़ा है। पेट्रोल, डीजल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति और धारणा को प्रभावित किया है।
सांस्कृतिक कारक: 'अधिक मास' होने के कारण लोग कीमती वस्तुओं की खरीदारी से परहेज कर रहे हैं।

उद्योग पर प्रभाव

इस मंदी की सबसे ज्यादा मार असंगठित कारोबार पर पड़ी है, जो कुल ट्रेड का लगभग 65% हिस्सा है। जॉयलुक्कास जैसी बड़ी रिटेल चेन ने भी अपनी मांग में 35% से अधिक की गिरावट देखी है। विशेषज्ञों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निवेश के उद्देश्य से होने वाली सोने की मांग (इनवेस्टमेंट डिमांड) में भी कमी आई है, जबकि मार्च तिमाही में बार और कॉइन की मांग 34% बढ़कर 62.3 टन रही थी।
भारत में सोने की कुल वार्षिक खपत 800 से 850 टन के बीच रहती है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दूसरी तिमाही में मांग के कमजोर रहने के आसार हैं।

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