Edited By jyoti choudhary,Updated: 22 May, 2026 05:42 PM

सोने की बढ़ती कीमतों और आयात शुल्क में हालिया वृद्धि का असर देश के संगठित स्वर्ण आभूषण खुदरा क्षेत्र पर साफ दिख सकता है। क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में ज्वेलरी बिक्री मात्रा के लिहाज से 13 से 15 प्रतिशत तक घट सकती...
बिजनेस डेस्कः सोने की बढ़ती कीमतों और आयात शुल्क में हालिया वृद्धि का असर देश के संगठित स्वर्ण आभूषण खुदरा क्षेत्र पर साफ दिख सकता है। क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में ज्वेलरी बिक्री मात्रा के लिहाज से 13 से 15 प्रतिशत तक घट सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष में भी सोने के आभूषणों की बिक्री में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
हालांकि, मात्रा में गिरावट के बावजूद राजस्व में वृद्धि की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की ऊंची कीमतों के चलते प्रति यूनिट अधिक मूल्य मिलने से इस क्षेत्र का कुल राजस्व 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसके बावजूद कंपनियों पर कार्यशील पूंजी और इन्वेंट्री लागत का दबाव बना रहेगा, हालांकि बेहतर नकदी प्रवाह से उनकी वित्तीय स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर रहने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 720 टन सोने का आयात किया, जिससे लगभग 72 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा देश से बाहर गई। व्यापार घाटा नियंत्रित करने और रुपए को सहारा देने के उद्देश्य से सरकार ने हाल ही में सोने पर सीमा शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है।
क्रिसिल के अनुसार, पिछले वर्ष वैश्विक अनिश्चितताओं और रुपये में कमजोरी के कारण घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका सीधा असर उपभोक्ता मांग पर पड़ा है। ऐसे में उपभोक्ता अब हल्के वजन और कम कैरेट (16 से 22 कैरेट) वाले आभूषणों की ओर अधिक रुख कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में निवेश के रूप में सोने की मांग तेजी से बढ़ी है। इस दौरान सोने की छड़ (बार) और सिक्कों की बिक्री 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है, जबकि आभूषणों की मांग में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक हिमांक शर्मा के अनुसार, आयात शुल्क में वृद्धि सोने की मांग पर बड़ा दबाव डाल सकती है और चालू वित्त वर्ष में कुल आभूषण बिक्री घटकर 620 से 640 टन तक रह सकती है, जो पिछले एक दशक का निचला स्तर होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आयात नीति में संभावित बदलाव और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव इस सेक्टर के लिए प्रमुख जोखिम बने रहेंगे। हालांकि, संगठित खुदरा विक्रेता फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए विस्तार कर रहे हैं, जिससे उनकी पहुंच छोटे शहरों तक बढ़ रही है और प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है।