Edited By jyoti choudhary,Updated: 02 May, 2026 12:36 PM

भारत में सोने के आयात में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। अप्रैल महीने में गोल्ड इंपोर्ट घटकर करीब 15 टन रह गया है, जो पिछले लगभग 30 सालों में सबसे निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह बैंकों पर अचानक लगाए गए टैक्स को माना जा रहा है।
बिजनेस डेस्कः भारत में सोने के आयात में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। अप्रैल महीने में गोल्ड इंपोर्ट घटकर करीब 15 टन रह गया है, जो पिछले लगभग 30 सालों में सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट की मुख्य वजह बैंकों द्वारा सोने की शिपमेंट रोकना है, जो 3% IGST टैक्स को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के बाद सामने आया है। इससे देश के गोल्ड मार्केट के साथ-साथ वैश्विक कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्या है गिरावट की वजह?
जानकारी के मुताबिक, भारत में ज्यादातर रिफाइंड सोना बैंकों के जरिए आयात किया जाता है लेकिन हाल ही में कस्टम विभाग ने सोने के आयात पर 3% इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स (IGST) लागू कर दिया है, जिसके चलते बैंकों ने सोने की खरीद पूरी तरह रोक दी है।
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दरअसल, जब 2017 में IGST लागू किया गया था, तब बैंकों को इस टैक्स से छूट दी गई थी। अब सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश में देरी के कारण कस्टम विभाग यह टैक्स वसूल रहा है। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, अप्रैल में बैंकों ने कस्टम से कोई भी सोना क्लियर नहीं कराया। हालांकि, थोड़ी मात्रा में सोना India International Bullion Exchange (IIBX) के जरिए आयात किया गया।
पिछले सालों से तुलना
अप्रैल 2026 में भारत ने 35 टन सोना आयात किया था, साल 2025-26 में हर महीने करीब 60 टन सोना आयात हुआ। अप्रैल 2026 में इसमें बड़ी गिरावट आई और ये गिरकर 15 टन पर पहुंच गया, जिसपर करीब 1.3 अरब डॉलर का खर्च किया गया, जो कि उसके औसत मंथली खर्च से 6 अरब डॉलर से काफी कम है। अक्षय तृतीया के बावजूद अप्रैल में सोने के आयात में ये कमी आई है।
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ग्लोबल असर की आशंका
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। ऐसे में आयात में यह भारी गिरावट वैश्विक सोने की कीमतों पर भी असर डाल सकती है।
निवेश की मांग में उछाल
World Gold Council (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च तिमाही में पहली बार निवेश के लिए सोने की मांग ज्वेलरी से ज्यादा रही। निवेश मांग 52% बढ़कर 82 टन हो गई जबकि ज्वेलरी मांग 19.5% घटकर 66 टन रह गई।
WGC के भारत प्रमुख सचिन जैन के अनुसार, आने वाले समय में निवेश के तौर पर सोने की मांग और बढ़ सकती है, क्योंकि निवेशक शेयर बाजार के कमजोर रिटर्न के बीच सुरक्षित विकल्प की तलाश कर रहे हैं।