Edited By jyoti choudhary,Updated: 26 Feb, 2026 06:14 PM

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलाव, डॉलर पर निर्भरता में कमी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोने को लेकर दीर्घकालिक तस्वीर मजबूत बनी हुई है। Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक, सोना अब पारंपरिक चक्रीय तेजी से...
बिजनेस डेस्कः वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलाव, डॉलर पर निर्भरता में कमी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोने को लेकर दीर्घकालिक तस्वीर मजबूत बनी हुई है। Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक, सोना अब पारंपरिक चक्रीय तेजी से आगे बढ़कर एक नए “सुपरसाइकल” चरण में प्रवेश कर चुका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया, जो आधुनिक दौर की सबसे मजबूत तेजी में से एक माना जा रहा है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में कॉमेक्स पर सोने का भाव 6,000 डॉलर प्रति औंस (घरेलू बाजार में करीब 1.85 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) के आसपास स्थिर हो सकता है। यदि वैश्विक तनाव और राजकोषीय दबाव बढ़ते हैं तो मध्यम अवधि में कीमत 7,500 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है।
कंपनी के जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी के अनुसार, केंद्रीय बैंकों द्वारा डॉलर आधारित परिसंपत्तियों से हटकर विविधीकरण की रणनीति अपनाना सोने को संरचनात्मक समर्थन दे रहा है। पिछले चार वर्षों से केंद्रीय बैंक हर साल करीब 1,000 टन सोना खरीद रहे हैं, जिससे मांग मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सकारात्मक वास्तविक ब्याज दरों के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी जारी रहना निवेशकों की सोच में बदलाव को दर्शाता है। निवेशक अब सोने को केवल मुद्रास्फीति से बचाव के साधन के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक वित्तीय और मुद्रा जोखिम के खिलाफ सुरक्षा कवच के तौर पर देख रहे हैं।
सीमित खदान उत्पादन, घटते वैश्विक भंडार और बढ़ती उत्पादन लागत ने आपूर्ति पक्ष को कमजोर रखा है। घरेलू बाजार में रुपये की कमजोरी और खुदरा निवेशकों की मजबूत मांग ने भी कीमतों को सहारा दिया है।