Edited By jyoti choudhary,Updated: 17 Oct, 2026 04:40 PM

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर गोल्डमैन सैक्स ने बड़ा अनुमान जताया है। ग्लोबल फाइनेंशियल कंपनी के मुताबिक, साल 2027 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है। इसकी प्रमुख वजह मिडिल ईस्ट से
नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर गोल्डमैन सैक्स ने बड़ा अनुमान जताया है। ग्लोबल फाइनेंशियल कंपनी के मुताबिक, साल 2027 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है। इसकी प्रमुख वजह मिडिल ईस्ट से तेल की आपूर्ति में सुधार, दूसरे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ना और वैश्विक मांग में कमजोरी है। हालांकि, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ने पर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
दिसंबर 2026 में 90 डॉलर रह सकता है ब्रेंट क्रूड
गोल्डमैन सैक्स में ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च के सह-प्रमुख और ऑयल रिसर्च हेड डान स्ट्रुवेन के मुताबिक, दिसंबर 2026 में ब्रेंट क्रूड का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है। इससे पहले कंपनी ने इसके 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था।
वहीं, 2027 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना जताई गई है। कंपनी का मानना है कि वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव आ सकता है।
तेल की सप्लाई में कमी का अंतर हुआ कम
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट से तेल निर्यात में सुधार, फारस की खाड़ी के बाहर उत्पादन में बढ़ोतरी और मांग में गिरावट से वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी काफी कम हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में वैश्विक तेल की मांग आपूर्ति से 7.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन अधिक थी। सितंबर में यह अंतर घटकर केवल 0.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया। कंपनी का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही में वैश्विक तेल बाजार अतिरिक्त आपूर्ति यानी सरप्लस की स्थिति में आ सकता है। 2027 में भी यह स्थिति बने रहने की उम्मीद है।
अभी क्यों महंगा बना हुआ है कच्चा तेल?
आपूर्ति में सुधार के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, निकट भविष्य में डिलीवरी वाले फिजिकल ब्रेंट क्रूड की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी है, जबकि बेंचमार्क ब्रेंट फ्यूचर्स भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहे हैं।
तेल की कीमतों में लगभग 25 डॉलर प्रति बैरल का रिस्क प्रीमियम शामिल होने का अनुमान है। इसका मतलब है कि बाजार में संभावित आपूर्ति बाधित होने के जोखिम के कारण भी कीमतें बढ़ी हुई हैं। वैश्विक तेल भंडार का निचले स्तर के करीब होना भी चिंता बढ़ा रहा है।
तेल की मांग में कमजोरी भी बड़ी वजह
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, 2026 की तीसरी तिमाही में वैश्विक तेल खपत में सालाना आधार पर 3.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन की गिरावट दर्ज की गई। चीन, मिडिल ईस्ट और विकसित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में मांग की कमजोरी का अधिक असर दिखाई दिया।
कंपनी को उम्मीद है कि रिफाइंड तेल उत्पादों की उपलब्धता और किफायती पहुंच बेहतर होने पर मांग में धीरे-धीरे सुधार होगा। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता इस्तेमाल और चीन में ईंधन की खपत के बदलते तौर-तरीके भविष्य में तेल की मांग को सीमित कर सकते हैं।