IDBI Bank Share: सरकार के एक फैसले से IDBI Bank का शेयर हुआ धड़ाम, 15% तक टूट गए भाव

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 01:28 PM

idbi bank shares plunge following government decision

सोमवार को शुरुआती कारोबार में IDBI Bank के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार बैंक के विनिवेश (डिसइन्वेस्टमेंट) की प्रक्रिया रोकने पर विचार कर रही है, जिसके बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ गई और शेयर में तेज बिकवाली...

बिजनेस डेस्कः सोमवार को शुरुआती कारोबार में IDBI Bank के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार बैंक के विनिवेश (डिसइन्वेस्टमेंट) की प्रक्रिया रोकने पर विचार कर रही है, जिसके बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ गई और शेयर में तेज बिकवाली हुई।

बीएसई पर बैंक का शेयर पिछले सत्र में 92.20 रुपए पर बंद हुआ था, जबकि सोमवार को यह 78.05 रुपए पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 77 रुपए तक गिर गया। करीब 11:50 बजे यह 14.48% गिरकर 78.85 रुपए पर ट्रेड कर रहा था। बैंक का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 118.45 रुपए और न्यूनतम स्तर 72.04 रुपए रहा है।

फ्लोर प्राइस से कम आई बोली

सूत्रों के मुताबिक बैंक के विनिवेश के लिए मिली फाइनेंशियल बोली सरकार द्वारा तय किए गए फ्लोर प्राइस से कम रही। इसी वजह से सरकार इस प्रक्रिया को फिलहाल रोकने पर विचार कर रही है। अगर सरकार बिक्री जारी रखती है तो पूरी बोली प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ सकती है।

मई 2021 में कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद 2023 में सरकार और Life Insurance Corporation of India (LIC) ने बैंक में अपनी-अपनी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा बेचने का फैसला किया था। फिलहाल बैंक में केंद्र सरकार की 45.48% और एलआईसी की 49.24% हिस्सेदारी है।

किसने लगाई बोली?

सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि बैंक के लिए किसने बोली लगाई है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक Fairfax Financial Holdings और Emirates NBD ने फाइनेंशियल बिड्स दी थीं। वहीं Kotak Mahindra Bank ने फरवरी में साफ कर दिया था कि उसने आईडीबीआई बैंक के लिए कोई बोली नहीं लगाई।

अगर बैंक में सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेचती है, तो शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस के हिसाब से उसे करीब 30,215 करोड़ रुपए मिल सकते हैं।

विनिवेश लक्ष्य पर असर

सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी कम करने की कोशिश में है लेकिन अगर इस बैंक की रणनीतिक बिक्री रद्द होती है, तो वित्त वर्ष 2027 में सरकार के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है। सरकार ने विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए 80,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय किया है।

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