AI पर IMF का बड़ा अलर्ट, 40% नौकरियों पर आ सकता है खतरा

Edited By Updated: 21 Feb, 2026 11:18 AM

imf issues major warning on ai 40 of jobs could be at risk

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और इसका असर जॉब मार्केट से लेकर एजुकेशन और इंडस्ट्री तक साफ दिखाई दे रहा है। कई बड़ी कंपनियां लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए AI टेक्नोलॉजी को तेजी से अपना रही हैं लेकिन...

बिजनेस डेस्कः दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और इसका असर जॉब मार्केट से लेकर एजुकेशन और इंडस्ट्री तक साफ दिखाई दे रहा है। कई बड़ी कंपनियां लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए AI टेक्नोलॉजी को तेजी से अपना रही हैं लेकिन इस बदलाव के साथ नौकरियों पर खतरे की आशंका भी बढ़ने लगी है।

International Monetary Fund (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर Kristalina Georgieva ने AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। IMF के सहयोग से की गई एक स्टडी के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 40 प्रतिशत एंट्री-लेवल नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं। एडवांस्ड इकॉनमी में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

नौकरी बाजार में ‘सुनामी’ का खतरा

जॉर्जीवा ने कहा कि AI के कारण रोजगार बाजार में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। उन्होंने इसे “सुनामी” जैसी स्थिति बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि AI वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है। IMF के आकलन के अनुसार, AI की वजह से ग्लोबल ग्रोथ में लगभग 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी संभव है, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था कोविड-पूर्व स्तर से भी तेज रफ्तार पकड़ सकती है।

विकास और अवसर दोनों

AI इम्पैक्ट समिट में बोलते हुए जॉर्जीवा ने कहा कि तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए तो भारत जैसे देशों के लिए यह बड़ा अवसर बन सकता है। उन्होंने “विकसित भारत” के लक्ष्य और 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की महत्वाकांक्षा का जिक्र किया।

उनका कहना है कि तेज आर्थिक विकास ज्यादा अवसर और नई नौकरियां पैदा करता है लेकिन इसके लिए जरूरी है कि देश स्किल डेवलपमेंट, री-स्किलिंग और नई टेक्नोलॉजी के अनुकूल नीतियों पर काम करें।

दोधारी तलवार साबित हो सकता है AI

जॉर्जीवा ने साफ कहा कि AI एक दोधारी तलवार है। जहां एक तरफ यह उत्पादकता और विकास दर को बढ़ा सकता है, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सरकारों और संस्थानों को अभी से तैयारी करनी होगी, ताकि रोजगार बाजार में आने वाले बदलाव का सामना किया जा सके।

कुल मिलाकर, AI आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा — सवाल यह है कि देश इसके अवसरों को कितनी समझदारी से भुना पाते हैं और चुनौतियों से कैसे निपटते हैं।
 

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