IMF Warns: मिडिल ईस्ट तनाव पर IMF की चेतावनी, दुनिया को लग सकता है बड़ा आर्थिक झटका

Edited By Updated: 31 Mar, 2026 12:37 PM

imf warns of major economic shock to the world amid middle east tensions

मीडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने गंभीर चेतावनी दी है। IMF के मुताबिक, यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है और हाल ही में उबर रही अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार थम सकती है।

 

बिजनेस डेस्कः मीडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने गंभीर चेतावनी दी है। IMF के मुताबिक, यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है और हाल ही में उबर रही अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार थम सकती है।

महंगाई और विकास पर डबल मार

IMF का कहना है कि इस संकट का असर अलग-अलग देशों पर अलग होगा लेकिन कुल मिलाकर दुनिया को कम आर्थिक विकास और ज्यादा महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर एशिया और अफ्रीका के तेल आयातक देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

तेल-गैस सप्लाई पर खतरा

तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिख रहा है, जहां से दुनिया की करीब 25-30% तेल और 20% गैस सप्लाई गुजरती है। इस कारण Brent Crude की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। साथ ही Donald Trump की ओर से ईरान के तेल ठिकानों पर हमले की चेतावनी ने बाजार में चिंता और बढ़ा दी है।

अब रसोई तक पहुंचेगा असर

IMF ने चेताया है कि यह संकट सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी देशों से फर्टिलाइजर सप्लाई में रुकावट और महंगे ईंधन के कारण खेती की लागत बढ़ेगी, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ेंगी। कम आय वाले देशों में जहां परिवार अपनी आय का करीब 36% भोजन पर खर्च करते हैं, वहां स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्टैगफ्लेशन का खतरा

अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो दुनिया को स्टैगफ्लेशन जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है- जहां महंगाई बढ़ती है और आर्थिक विकास घटता है। इससे कर्ज महंगा होगा और वैश्विक आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं।

भारत समेत कई देशों पर असर

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों और यूरोप की उन अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ेगा, जो कच्चे माल के लिए बाहरी सप्लाई पर निर्भर हैं।

आगे क्या?

IMF के अनुसार, असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह तनाव कितने समय तक चलता है। फिलहाल संकेत हैं कि स्थिति लंबी खिंच सकती है, जिससे महंगाई ऊंची बनी रह सकती है। IMF अपनी आगामी स्प्रिंग मीटिंग में ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ के जरिए इसका विस्तृत आकलन पेश करेगा।
 

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