Edited By jyoti choudhary,Updated: 22 May, 2026 02:06 PM

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ग्लोबल एनर्जी रिसर्च फर्म वुड मैकेंजी की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि यह महत्वपूर्ण समुद्री...
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ग्लोबल एनर्जी रिसर्च फर्म वुड मैकेंजी की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि यह महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो दुनिया गंभीर ऊर्जा संकट और आर्थिक मंदी की ओर बढ़ सकती है। साथ ही कहा है क्रूड ऑयल का दाम 200 डॉलर प्रति बैरल के एतिहासिक स्तर पर पहुंच जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से प्रतिदिन लगभग 1.1 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति होती है, जो वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा यहां से सालाना 8 करोड़ टन से अधिक एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की आपूर्ति भी होती है, जो दुनिया के कुल एलएनजी व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत है। यदि यह आपूर्ति बाधित रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा संतुलन गंभीर रूप से बिगड़ सकता है।
डीजल और जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने का खतरा
डीजल और जेट फ्यूल की कीमतें 300 डॉलर प्रति बैरल के बराबर तक पहुंचने का खतरा भी जताया गया है, जिससे वैश्विक परिवहन और हवाई यात्रा पर भारी असर पड़ेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि संघर्ष साल के अंत तक जारी रहता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में अफरातफरी फैल सकती है, क्योंकि किसी अन्य स्रोत से इतनी बड़ी आपूर्ति को तुरंत पूरा करना संभव नहीं है। इससे मालभाड़ा और सप्लाई चेन पर गंभीर दबाव बनेगा।
हालांकि रिपोर्ट में तीन संभावित परिदृश्य भी बताए गए हैं। पहले परिदृश्य में यदि 2026 के मध्य तक शांति समझौता हो जाता है, तो बाजार धीरे-धीरे स्थिर हो सकता है और ब्रेंट क्रूड 2027 तक 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। दूसरे परिदृश्य में यदि तनाव सितंबर तक जारी रहता है, तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2 प्रतिशत से नीचे जा सकती है और हल्की मंदी की स्थिति बन सकती है। तीसरे और सबसे गंभीर परिदृश्य में यदि साल के अंत तक मार्ग बंद रहता है, तो तेल की कीमतें 200 डॉलर तक पहुंचकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरी मंदी में धकेल सकती हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत पर भी इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई गई है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार, ऐसे हालात में व्यापार घाटा बढ़ सकता है और महंगाई में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। एजेंसी का अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड 90 से 95 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है।