Edited By jyoti choudhary,Updated: 20 May, 2026 02:02 PM

ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अर्थशास्त्रियों ने पूरी दुनिया को चेताया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहराने की चेतावनी यूएन ने दी है। यूएन अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, यह संकट वैश्विक...
बिजनेस डेस्कः ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अर्थशास्त्रियों ने पूरी दुनिया को चेताया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहराने की चेतावनी यूएन ने दी है। यूएन अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, यह संकट वैश्विक विकास की रफ्तार को धीमा कर सकता है, महंगाई बढ़ा सकता है और कोविड-19 से अब तक हुई ग्रोथ दोबारा मिट्टी में मिल सकती है। हालात बिगड़ने पर दुनिया की ग्रोथ 100 साल की सबसे सुस्त गति तक पहुंच सकती है।
वैश्विक ग्रोथ पर असर
संयुक्त राष्ट्र के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास दर घटकर लगभग 2.5% रह सकती है, जबकि पहले यह अनुमान 2.7% था। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो यह गिरकर 2.1% तक भी पहुंच सकती है।
यह भी पढ़ें: Work From Home देने के बाद देर रात आया ईमेल, मेटा ने 8000 कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाला
महंगाई बढ़ने का खतरा
संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग के अनुसार, इस संकट की वजह से वैश्विक महंगाई दर 3.9% तक जा सकती है। यह पहले के अनुमान से करीब 0.8% अधिक है।
100 साल की सबसे धीमी रफ्तार
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी शांतनु मुखर्जी के मुताबिक, यह पिछले 100 वर्षों में सबसे धीमी आर्थिक वृद्धि हो सकती है। इसमें COVID-19 महामारी और 2008 की आर्थिक मंदी जैसे बड़े संकटों का असर भी शामिल है।
यह भी पढ़ें: SBI ग्राहकों के लिए अलर्ट, 23 से 28 मई तक लगातार 6 दिन बंद रहेंगी बैंकिंग सेवाएं, जानिए क्यों?
तेल और सप्लाई चेन पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा से तेल, गैस और फर्टिलाइज़र की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों और उत्पादन लागत पर पड़ेगा।
कौन सबसे ज्यादा प्रभावित होगा
- विकसित देशों में महंगाई 2.6% से बढ़कर 2.9% तक जा सकती है
- विकासशील देशों में यह 4.2% से बढ़कर 5.2% तक पहुंच सकती है
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर हर सेक्टर पर पड़ता है, जिससे उत्पादन, ट्रांसपोर्ट और आम लोगों की कमाई पर दबाव बढ़ता है।