Edited By jyoti choudhary,Updated: 02 Apr, 2026 01:20 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (PNGRB) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा ने कहा है कि देश के पास मौजूद लिक्विड फ्यूल (कच्चा तेल) का भंडार केवल 20 से 40...
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (PNGRB) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा ने कहा है कि देश के पास मौजूद लिक्विड फ्यूल (कच्चा तेल) का भंडार केवल 20 से 40 दिनों तक ही जरूरत पूरी कर सकता है, इसे कई महीनों तक बढ़ाना संभव नहीं है।
उन्होंने बताया कि भारत के पास कुछ रणनीतिक भंडार जरूर है लेकिन तकनीकी और लॉजिस्टिक कारणों से 6 महीने तक का स्टॉक बनाना व्यवहारिक नहीं है।
मिडिल ईस्ट संकट का असर, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं
कुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर भारत पर पड़ रहा है लेकिन सरकार स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में फिलहाल ईंधन की कोई कमी नहीं है और जो भी चिंता दिख रही है, वह सिर्फ पैनिक सिचुएशन है।
पड़ोसी देशों की भी मदद
कुमार ने कहा भारत इस संकट की घड़ी में केवल अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर रहा, बल्कि बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की भी मदद कर रहा है।
आयात पर निर्भरता कम करना आसान नहीं
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना एक धीमी प्रक्रिया है और इसे तुरंत हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में कच्चे तेल की खरीद का दायरा काफी बढ़ाया है। अब आपूर्ति केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से भी तेल आ रहा है। इसके अलावा मोजाम्बिक और अंगोला में भी नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
तेल कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
PNGRB के अनुसार, अगर वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती भी हैं, तो यह बढ़ोतरी अस्थायी होगी और बाद में कीमतें सामान्य स्तर पर लौट सकती हैं।