Edited By jyoti choudhary,Updated: 03 Nov, 2026 05:58 PM

भारत का डेटा सेंटर उद्योग निवेश में अभूतपूर्व उछाल के लिए तैयार है। क्रिसिल रेटिंग्स ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि मार्च, 2030 तक स्थापित क्षमता पांच गुना बढ़कर लगभग 7.5 गीगावाट होने की उम्मीद है, जिससे अगले चार वित्त वर्षों में तीन लाख करोड़...
नई दिल्लीः भारत का डेटा सेंटर उद्योग निवेश में अभूतपूर्व उछाल के लिए तैयार है। क्रिसिल रेटिंग्स ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि मार्च, 2030 तक स्थापित क्षमता पांच गुना बढ़कर लगभग 7.5 गीगावाट होने की उम्मीद है, जिससे अगले चार वित्त वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित होगा।
जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जेनएआई), उद्यमों के डिजिटलीकरण और बढ़ती डेटा खपत से प्रेरित यह विस्तार देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे की स्थिति को बदलने के लिए तैयार है। हालांकि, मांग को स्थायी परिणाम में बदलने की उद्योग की क्षमता मुख्य रूप से समय पर बिजली संपर्क, नियामकीय मंजूरियों और परियोजनाओं के अनुशासित क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा, ''आने वाली क्षमता का लगभग आधा हिस्सा पहले से ही दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत प्रतिबद्ध है। क्लाउड अपनाने और अधिक कंप्यूटिंग क्षमता करने वाले जेनएआई कार्यों से प्रेरित बड़े क्लाउड सेवा प्रदाताओं के साथ गठजोड़ शुरुआत से ही राजस्व की निश्चितता प्रदान करते हैं। इससे परियोजनाओं के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।''
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक आनंद कुलकर्णी ने कहा, ''भारत के संरचनात्मक लागत लाभ डेटा सेंटर गंतव्य के रूप में इसके आकर्षण को और बढ़ाते हैं। अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर जमीन, निर्माण और श्रम लागत के कारण कई एशिया-प्रशांत बाजारों की तुलना में यहां लागत लगभग 20 प्रतिशत कम है।''