इक्विटी डेरिवेटिव्स में छोटे ट्रेडर्स को बड़ा झटका, 9.6 अरब डॉलर का नुकसान

Edited By Updated: 14 Aug, 2026 12:56 PM

india s small traders lose us 9 6 billion despite options curbs

भारत में छोटे और रिटेल ट्रेडर्स के लिए फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कारोबार में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान रिटेल निवेशकों का इक्विटी डेरिवेटिव्स में कुल नुकसान करीब 9.61 अरब डॉलर यानी 916.85 अरब रुपए रहा।...

नई दिल्लीः भारत में छोटे और रिटेल ट्रेडर्स के लिए फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कारोबार में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान रिटेल निवेशकों का इक्विटी डेरिवेटिव्स में कुल नुकसान करीब 9.61 अरब डॉलर यानी 916.85 अरब रुपए रहा। हालांकि, यह नुकसान पिछले वित्त वर्ष के करीब 1.12 लाख करोड़ रुपए के नुकसान से कम है।

सरकार ने संसद में यह जानकारी दी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की लिखित जानकारी के मुताबिक, इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेड करने वाले निवेशकों की संख्या भी घटकर 80 लाख से कम रह गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 98 लाख था।

9 में से 10 रिटेल ट्रेडर्स को हुआ था नुकसान

रिटेल निवेशकों के लगातार नुकसान को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डेरिवेटिव्स कारोबार पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं। SEBI के एक अध्ययन में पाया गया था कि हर 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर्स को डेरिवेटिव्स में नुकसान हुआ।

इसके बावजूद यह लगातार पांचवां साल रहा जब व्यक्तिगत निवेशकों को F&O कारोबार में नुकसान उठाना पड़ा। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि नियामकीय सख्ती के बावजूद रिटेल निवेशकों को जोखिम भरे डेरिवेटिव्स कारोबार से दूर रखना इतना मुश्किल क्यों है।

SEBI ने कड़े किए कई नियम

रिटेल भागीदारी और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए SEBI ने डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट का आकार बढ़ाने, पोजिशन लिमिट कड़ी करने और कई अन्य सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और स्टॉक ब्रोकरों के लिए फंडिंग से जुड़े नियम भी सख्त किए।

इन कदमों का असर स्टॉक एक्सचेंजों की ट्रेडिंग गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सूचीबद्ध फ्यूचर्स और ऑप्शंस का औसत दैनिक नॉशनल टर्नओवर जुलाई में जून की तुलना में 23 फीसदी घटकर 214 लाख करोड़ रुपए रह गया। यह करीब 17 महीनों का निचला स्तर है।

रिटेल ट्रेडर्स की हिस्सेदारी फिर बढ़ी

दिलचस्प बात यह है कि सख्ती के बावजूद इक्विटी डेरिवेटिव्स में रिटेल निवेशकों का प्रभाव बढ़ा है। NSE के आंकड़ों के अनुसार, इन कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग का करीब 31 फीसदी हिस्सा व्यक्तिगत निवेशकों के पास है, जो पिछले साल 26 फीसदी था।

F&O में कम रकम के जरिए शेयरों की कीमतों पर दांव लगाने का मौका मिलता है, जिससे यह सेगमेंट रिटेल निवेशकों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है।

बड़े ट्रेडर्स पर भी पड़ा असर

नियामकीय सख्ती और बढ़ती ट्रेडिंग लागत ने बड़े खिलाड़ियों की गतिविधियों को भी प्रभावित किया है। NSE पर प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स, जिनमें हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म भी शामिल हैं, की नॉशनल डेरिवेटिव्स टर्नओवर में हिस्सेदारी जून में घटकर 58.1 फीसदी रह गई, जबकि पिछले साल यह 60 फीसदी से अधिक थी।

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने मार्च में कहा था कि नियामक इक्विटी डेरिवेटिव्स में अत्यधिक सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए डेटा आधारित और संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगा। फिलहाल उसका मुख्य फोकस कम अवधि वाले इंडेक्स ऑप्शंस पर है यानी नियमों की सख्ती से ट्रेडिंग गतिविधि जरूर कम हुई है लेकिन रिटेल निवेशकों का F&O के प्रति आकर्षण और उनका नुकसान अब भी बाजार नियामक के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!